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जैन और आदिवासी अपनी परंपरा के अनुरूप करेंगे पूजा, पारसनाथ पर उपजे विवाद को खत्म करने को लेकर हुई बैठक

Updated at : 09 Jan 2023 10:55 AM (IST)
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जैन और आदिवासी अपनी परंपरा के अनुरूप करेंगे पूजा, पारसनाथ पर उपजे विवाद को खत्म करने को लेकर हुई बैठक

गिरिडीह के पारसनाथ से जुड़ी धार्मिक आस्था और पूजा को लेकर उपजे विवाद पर जैन और आदिवासी समुदाय के बीच बैठक हुई. इस बैठक में कई बातों पर सहमति बनी. दोनों धर्मों के लोग अपनी-अपनी पुरानी परंपराओं और मान्यताओं के अनुरूप पूजा अर्चना करेंगे.

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Jharkhand News: पारसनाथ पर्वत से जुड़ी धार्मिक आस्था और पूजा को लेकर उपजे विवाद को समाप्त करने के लिए गिरिडीह के मधुबन में बैठक हुई. जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में आदिवासी व जैन समाज की विभिन्न कमेटियों के प्रतिनिधियों के अलावा स्थानीय सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग और जनप्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक में कई बिंदुओं पर सकारात्मक निर्णय लिये गये.

दोनों धर्मों के लोग अपनी मान्यताओं के अनुरूप करेंगे पूजा अर्चना

तय हुआ कि पारसनाथ पर्वत पर दोनों धर्मों के लोग अपनी-अपनी पुरानी परंपराओं और मान्यताओं के अनुरूप पूजा-अर्चना करेंगे. साथ ही एक-दूसरे की धार्मिक आस्था का सम्मान करेंगे. बैठक में शामिल विभिन्न समाज और संगठनों के लोगों ने कहा कि पारसनाथ पर्वत पर फिलहाल स्वामित्व की लड़ाई नहीं है और न ही कोई विवाद है. मौजूदा विवाद केवल धार्मिक आस्था को लेकर है, जिसे आपसी भाईचारे के साथ खत्म किया जा सकता है. उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बताया कि बैठक में सकारात्मक वार्ता हुई है. कुछ विवाद था, जो संवादहीनता की वजह से बढ़ रहा था. बैठक में सभी ने अपनी भावनाएं व्यक्त की. आदिवासी, मूलवासी, स्थानीय निवासी और जैन समाज वर्षों से चली आ रही अपनी-अपनी पुरानी व्यवस्था और परंपरा को साथ लेकर चलेंगे. पूरे मामले की निगरानी के लिए अनुमंडल प्रशासन के नेतृत्व में समन्वय समिति ठित की जायेगी. बैठक में गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार, एसपी अमित रेणु, एसी विल्सन भेंगरा आदि मौजूद थे.

पारसनाथ मरांग बुरू था, है और रहेगा

गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार ने कहा कि मरांग बुरू के सवाल पर कोई विवाद नहीं है. पारसनाथ पर्वत मरांग बुरू था, है और रहेगा. सैकड़ों वर्ष से चली आ रही परंपरा आगे भी बरकरार रहेगी. जैन और आदिवासियों का संबंध तीर्थंकरों के जमाने से है. आज के बाद दोनों धर्मों के लोग एक-दूसरे के धार्मिक आस्था का सम्मान करेंगे और अपनी-अपनी परंपराओं के अनुरूप पूजा-अर्चना करेंगे.

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समन्वय समिति का किया जायेगा गठन : डीसी

बैठक समाप्ति के बाद डीसी नमन प्रियेश लकड़ा ने कहा कि बैठक में सकारात्मक वार्ता हुई है. बिना बात का कुछ विवाद था. कम्युनिकेशन गैप के कारण यह विवाद बढ़ रहा था. सभी ने बैठक में अपनी-अपनी भावना को व्यक्त किया. लेकिन किसी में खटास व विवाद नहीं पाया गया. कई वर्षों से जो आदिवासियों, मूलवासियों और स्थानीय निवासियों के साथ-साथ जैनियों की आस्था रही है, वह पुरानी व्यवस्था को लेकर ही चलेंगे. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निगरानी के लिए एक समन्वय समिति का गठन किया जायेगा. अनुमंडल प्रशासन के नेतृत्व में यह कमेटी काम करेगी. श्री लकड़ा ने कहा कि इस कमेटी में जैनियों के साथ-साथ स्थाानीय सामाजिक लोगों की भी भागीदारी होगी. लोग अपनी बात को इस कमेटी के पास रख सकेंगे.

पारसनाथ बचाओ महाजुटान को लेकर 10 को शंखनाद

एक ओर जहां धार्मिक आस्था को लेकर हुए विवाद को समाप्त करने की दिशा में मधुबन गेस्ट हाउस में बैठक हो रही थी, वहीं दूसरी ओर ‘मरांग बुरू पारसनाथ बचाओ संघर्ष समिति’ आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रही थी. समिति ने कहा है कि पारसनाथ बचाओ महाजुटान का कार्यक्रम विभिन्न चरणों में होगा. मरांग बुरू सावंता सुसार बैसी के जिला सचिव सिकंदर हेंब्रम ने कहा कि पूर्व की घोषणा के अनुरूप 10 जनवरी को मधुबन थाना के पास स्थित मैदान में पारसनाथ बचाओ आंदोलन का शंखनाद किया जायेगा. इस महाजुटान में न सिर्फ स्थानीय आदिवासी और मूलवासी, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के लोग भाग लेंगे. उन्होंने कहा कि 30 जनवरी को उलिहातू में भूख हड़ताल की जायेगी. दो फरवरी को भोगना में मरांग बुरू बचाओ अभियान को लेकर महाजुटान कार्यक्रम होगा.

रिपोर्ट : राकेश सिन्हा, गिरिडीह.

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Samir Ranjan

लेखक के बारे में

By Samir Ranjan

Senior Journalist with more than 20 years of reporting and desk work experience in print, tv and digital media

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