बढ़ती नौसैनिक ताकत

Mumbai: Decommissioned aircraft carrier of the Indian Navy, INS Viraat during its last journey from Naval Dockyard to Alang in Gujarat, where it will be dismantled, in Mumbai, Saturday, Sept. 19, 2020. (PTI Photo) (PTI19-09-2020_000143B)
संधायक 11 हजार किलोमीटर के दायरे में बंदरगाहों, तटों, यातायात आदि की निगरानी के साथ-साथ कई तरह की गतिविधियों के लिए सक्षम है.
सर्वेक्षण पोत संधायक के बेड़े में शामिल होने से भारतीय नौसेना की क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है. यह नौसेना का पहला सर्वेक्षण पोत है, जो बड़े सर्वे पोत परियोजना के तहत बनाया गया है. यह 11 हजार किलोमीटर के दायरे में बंदरगाहों, तटों, यातायात आदि की निगरानी के साथ-साथ कई तरह की गतिविधियों के लिए सक्षम है. इसी नाम का एक पोत पहले नौसेना की सेवा में था, लेकिन नया पोत क्षमता और सुविधा में उससे बेहतर है. पिछले कुछ वर्षों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प के अनुसार चल रहे आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत नौसेना समेत विभिन्न रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति स्वदेशी निर्माण और उत्पादन से करने का प्रयास जोरों से चल रहा है. इस क्रम में अनेक युद्धपोतों, छोटे पोतों और पनडुब्बियों का निर्माण देश में ही किया जा रहा है. इनमें से कई को नौसेना में शामिल भी किया जा चुका है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, संधायक के निर्माण लागत के 80 प्रतिशत हिस्से के कल-पुर्जों और वस्तुओं को भारत में ही बनाया गया है. रक्षा क्षेत्र में इस विकास से संबंधित शोध, अनुसंधान और उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है. भारत की समुद्री सीमा की लंबाई 75 सौ किलोमीटर से अधिक है. सीमा सुरक्षा के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांतिपूर्ण और सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने में भी भारतीय नौसेना की बड़ी भूमिका है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उचित ही रेखांकित किया है कि सुरक्षा के संबंध में हम हिंद महासागर में पहले स्थान पर आ गये हैं. समुद्री यातायात में लुटेरों के गिरोह बहुत बड़ी बाधा हैं. संधायक पोत ने समुद्री लुटेरों पर नजर रखने और उनके विरुद्ध कार्रवाई में भी बड़ी मदद मिलेगी तथा इससे अवैध रूप से मछली पकड़ने वालों पर भी लगाम लगायी जा सकेगी. लाल सागर में बढ़ते तनाव जैसे मामलों ने भी समुद्री आवाजाही के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए भारतीय नौसेना ने अरब सागर में लगभग 10 युद्धपोतों की तैनाती की है. हिंद महासागर में चीनी नौसेना की सक्रियता कुछ वर्षों से बढ़ी है और चीन इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को आक्रामकता के साथ बढ़ाने में लगा हुआ है. विक्रांत और संधायक जैसे अनेक नये पोतों और पनडुब्बियों की तैनाती चीन के लिए एक गंभीर संदेश भी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में जुटा हुआ है. साथ ही, भारतीय बंदरगाहों का भी तेजी से विस्तार हो रहा है. ऐसे में अपने आयात और निर्यात को सुचारू रखने के साथ-साथ दूसरे देशों के जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी भारत की है. सक्षम नौसेना मित्र राष्ट्रों और संकट में घिरे जहाजों को भी मदद मुहैया कराती रही है. संधायक पोत इसमें एक बड़ा सहयोगी साबित होगा.
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