नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में गोड्डा कोर्ट का फैसला, 2 को 30 साल और एक को 7 साल की मिली सजा

सीबीआइ कोर्ट दूसरी चार्जशीट दाखिल.
jharkhand news: गोड्डा कोर्ट ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म मामले में तीन आरोपियों को सजा सुनायी है. इसमें दो आरोपियों को 30 साल की सश्रम कारावास और एक अन्य को 7 साल का सजा सुनायी है. साथ ही तीनों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है.
Jharkhand news: गोड्डा में स्पेशल न्यायाधीश सह तृतीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश जनार्दन सिंह की कोर्ट ने नाबालिग को अपहरण कर कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में तीन आरोपियों को सजा सुनायी है. कोर्ट में 2 आरोपियों को 30 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनायी और एक- एक लाख का जुर्माना लगाया है. वहीं, एक अन्य आरोपी को 7 साल की सजा और 50 हजार का जुर्माना लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर सजा की अवधि बढ़ाने का आदेश कोर्ट ने दिया है. सभी आरोपी बसंतराय थाना अंतर्गत मोकलचक गांव के रहने वाले हैं.
कोर्ट ने आरोपी मो सोहेल और मो बहाव को नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने का दोषी पाते हुए 30 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. वहीं, एक अन्य आरोपी प्रदीप कुमार सिंह को 366 ए में दोषी पाते हुए 7 साल की सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.
नाबालिग पीड़िता 16 फरवरी, 2018 को सुबह नित्य क्रिया के लिए घर से बाहर निकली थी, लेकिन फिर घर वापस नहीं लौटी. इस पर पीड़िता के पिता द्वारा अपने स्तर से पारिवारिक सदस्यों में खोजबीन किया, तो पता चला कि मो बहाव और मो सोहेल भी उस दिन से अपने घर में नहीं है. पीड़िता के पिता को यह विश्वास हुआ कि मो सोहेल के सहयोग से मो बहाव उसकी नाबलिग पुत्री को बहला- फुसला कर ले गया है. पीड़िता के पिता द्वारा बसंतराय थाना में लिखित प्राथमिकी मो बहाव और मो सोहेल के खिलाफ दर्ज करायी थी.
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पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज करायी प्राथमिकी के बाद जब पुलिस ने जांच-पड़ताल शुरू की, तो आरोपी मो बहाव और मो सोहेल के साथ प्रदीप कुमार सिंह की सहभागिता की भी जानकारी मिली. पुलिस द्वारा तीनों को आरोपी बनाया गया.
पुलिस द्वारा आरोप पत्र समर्पित करने के बाद अभियोजन पक्ष द्वारा 12 गवाहों की गवाही कोर्ट में दिलायी गयी. जिसमें पीड़िता भी शामिल थी. कोर्ट में पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि उसे जबरन मुंह में कपड़ा डाल कर उसकी मर्जी के खिलाफ बरहेट ले जाया गया. वहां से चेन्नई व दिल्ली भी ले जाया गया. उसकी इच्छा के खिलाफ गलत काम किया गया. आरोपियों ने ट्रेन से उसे भागलपुर भेज दिया. पीड़िता ने अपने बयान में न्यायालय को यह भी बताया कि वह पायल बेच कर वापस अपने घर आयी.
अभिलेख में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी पाते हुए सजा काटने के लिए जेल भेज दिया. कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा है कि विक्टिम कम्पनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता को पुनर्वास व आर्थिक सहायता के लिए डीएलएसए को निर्णय की प्रति भेजी जाए. सरकार द्वारा समय-समय पर मिलने वाले सहायता व पुनर्वास की राशि पीड़िता को मिल सके.
Posted By: Samir Ranjan.
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