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गिरिडीह : गोपाल गोशाला में महिलाओं को मिलेगा गोबर से दीया बनाने का प्रशिक्षण

Updated at : 29 Oct 2023 3:00 PM (IST)
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गिरिडीह : गोपाल गोशाला में महिलाओं को मिलेगा गोबर से दीया बनाने का प्रशिक्षण

पचंबा स्थित गोपाल गोशाला में बहुत जल्द गाय के गोबर से दीया बनाया जायेगा. इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा, ताकि महिलाएं इसके जरिये आत्मनिर्भर हो सके. इसकी जानकारी पचंबा गोपाल गोशाल के सचिव ध्रुव संथालिया ने दी.

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प्रदीप कुमार, गिरिडीह : पचंबा स्थित गोपाल गोशाला में बहुत जल्द गाय के गोबर से दीया बनाया जायेगा. इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जायेगा, ताकि महिलाएं इसके जरिये आत्मनिर्भर हो सके. इसकी जानकारी पचंबा गोपाल गोशाल के सचिव ध्रुव संथालिया ने दी. उन्होंने बताया कि देवघर जिले के दुम्मा में गाय के गोबर से आकर्षक दीया बनाये जा रहे हैं. उन्होंने उक्त गोशाला का भ्रमण किया. इसमें उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला. उन्होंने एकल हरि गौ-ग्राम योजना प्रमुख को पचंबा के गोपाल गोशाला में गोबर से दीया बनाने के लिए प्रशिक्षण देने की अपील की है. उन्होंने बताया कि किसान गोपाल गोशाला में रहकर महिलाएं तीन से सात दिन का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगी. कहा कि वर्तमान में इस योजना को सुचारू रूप से संचालन के लिए गिरिडीह पचंबा श्री गोपाल गोशाला हरसंभव सहयोग कर रहा है और भविष्य में भी करता रहेगा.

मातृ शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास

एकल श्रीहरि द्वारा संचालित श्री हरि गौ ग्राम योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा. इसकी शुरुआत 22 नवंबर 2020 को गोपाष्टमी उत्सव के अवसर पर मथुरा (वृन्दावन) से की गयी है. इस योजना के क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण परिवार की महिलाओं को एकल श्री हरि गौ ग्राम योजना का सदस्य बनाकर उन्हें गौवंश दिया जा रहा है. गौवंश की देखरेख के लिए 10 रुपये किलो में सूखे गोबर की खरीदारी की जा रही है. सूखे गोबर की बिक्री से गौ पालन पोषण करने वाले परिवार को प्रतिमाह 1200 से 1500 की आमदनी हो जा रही है. इससे अनुपयोगी गौवंश का पालन पोषण का खर्च करती हैं.

कैसे बनता है गाय के गोबर से दीया

श्री हरि गौ ग्राम योजना के तहत बनाये गये केंद्र में सूखे गोबर को प्राप्त कर उसकी पिसाई की जाती है तथा उसमें मिट्टी के साथ साथ अन्य प्राकृतिक सामग्री को मिलाकर एक प्रीमिक्स तैयार किया जाता है. महिला सदस्यों को प्रतिमाह 120 किलो गोबर से तैयार प्रीमिक्स दिया जाता है. एक किलो गोबर से तैयार प्रीमिक्स से 40 दीपक बनते है. महिला सदस्य अपनी दिनचर्या से बचे समय में से प्रतिदिन दो घंटे का समय निकालकर दीपक तैयार करती है. 120 किलो प्रीमिक्स से महिला सदस्य प्रतिमाह 7200 दीपक तैयार करती हैं. उन्हें 75 पैसे प्रति दीपक के हिसाब से 5400 रुपये का भुगतान होता है. इन महिला सदस्यों के द्वारा बनाये गये दीपक को श्री हरि गौ ग्राम केंद्र में लाकर रंगने वो डिजाइन बनाने का कार्य भी महिलाएं ही करतीं हैं. चार महिलाएं 800-900 दीपक रंगने व नक्कासी करने का कार्य करती है. इसके बदले उन्हें आठ सौ रुपये दिया जाता है.

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ग्रामीण क्षेत्र की इन महिला सदस्यों के द्वारा दीपक के साथ-साथ धुपबत्ती, राखी, सजावट समाग्री, मूर्ति आदि सामग्री भी बनायी जा रही हैं. सभी सामग्री को मुंबई भेजा जाता है. वहां इसकी पैकिंग होती है. इसके बाद सामग्री को बिक्री के लिए अन्य शहरों को भेजा जाता है. बताया गया कि अभी तक इस योजना को सफल बनाने के लिए झारखंड में 13 सेंटर तथा पश्चिम बंगाल में तीन सेंटर कार्य कर रहे हैं. हजारीबाग, देवघर, गिरिडीह, दुमका, झरिया, धनबाद की गोशाला से 320 अनुपयोगी गोवंशों के प्राप्त कर महिलाओं को वितरण करने का कार्य किया गया हैं.

केंद्रीय गौ ग्राम योजना प्रमुख प्रदीप स्वाइन, भुवनेश्वर के रहने वाले तथा राजू कुमार पांडेय केंद्रीय सह योजना प्रमुख ने बताया कि आने वाले समय में एक लाख परिवार को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य लिया गया है. एकल हरि गौ ग्राम योजना के केंद्रीय अध्यक्ष नारायण अग्रवाल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य एकल श्री हरि योजना से प्रशिक्षण प्राप्त व्यास के द्वारा गौ महिमा कथा सुनाकर ग्रामीण परिवार को गाय से जोड़ने के साथ-साथ जैविक खेती, हरे चारे का उत्पादन, गौ चिकित्सा का प्रशिक्षण गौवंशों का रख-रखाव तथा परिवार की दैनिक दिनचर्या को सुधारना है.

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