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Bihar News: जमुई का दयानंद नालंदा में कन्हैया बन करोड़ों की संपत्ति का बना वारिस, 41 साल बाद हुई सजा

Updated at : 06 Apr 2022 6:20 AM (IST)
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Bihar News: जमुई का दयानंद नालंदा में कन्हैया बन करोड़ों की संपत्ति का बना वारिस, 41 साल बाद हुई सजा

करोड़ों की संपत्ति का वारिस होने का दावा करनेवाले व्यक्ति को फर्जी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनायी. एक फर्जी योगी ने इस खेल को खेला. जमुई के रहने वाले आरोपित को जेल भेजा गया.

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बिहारशरीफ के जिला न्यायालय के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पंचम मानवेंद्र मिश्र ने मंगलवार को करीब चार दशक पुराने एक मामले में करोड़ों की संपत्ति का वारिस होने का दावा करनेवाले व्यक्ति को फर्जी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनायी. कोर्ट ने कन्हैया बने आरोपित दयानंद गोस्वामी उर्फ बालक दास को धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी करार करते हुए तीन वर्ष कारावास की सजा के साथ 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया. जुर्माना की राशि नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

फर्जी तरीके से सालों से अकूत संपत्ति पर राज करता रहा

अदालत ने इसमें स्पष्ट किया कि दयानंद गोस्वामी जमींदार कामेश्वर सिंह का पुत्र कन्हैया बनकर सालों से उनकी अकूत संपत्ति पर राज कर रहा है. उसने न सिर्फ जमींदार की संपत्ति हड़पने, बल्कि कई गलत साक्ष्य पेश कर कोर्ट को भी कई बार बरगलाया. दोषी पाया गया दयानंद गोस्वामी जमुई जिले के लक्ष्मीपुर थाने के लखैया गांव का निवासी है. यह मामला नालंदा जिले के बेन थाने के मुरगावां गांव का है.

41 वर्ष पुराने इस मामले की सुनवाई

मामले में अभियोजन की ओर से एपीओ राजेश पाठक ने बहस की. अधिवक्ता राजेश कुमार ने भी अभियोजन पक्ष के साथ कार्य किया. इस दौरान सात साक्षियों की गवाही और बचाव पक्ष के सात गवाहों का प्रति परीक्षण किया गया. 41 वर्ष पुराने इस मामले की सुनवाई के दौरान ही वादी रामसखी देवी व उनके पति कामेश्वर सिंह का निधन हो गया था. इसके बाद उनकी पुत्री ने केस जारी रखा था.

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क्या है पूरा मामला…

बताया गया है कि कामेश्वर सिंह व रामसखी देवी का इकलौता पुत्र कन्हैया 20 फरवरी, 1977 को मैट्रिक की परीक्षा देने चंडी गया था. वहीं से वह गायब हो गया. दोनों तांत्रिक से दिखाते रहे, जो बच्चे को जीवित होने का भरोसा देता रहा. चिंता से दोनों पति-पत्नी की तबीयत व मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा. इसी बीच मोतिहारी के एक तांत्रिक ने बताया कि उसका पुत्र तीन महीने में घर आ जायेगा. 20 सितंबर, 1981 को एक योगी आया और उसने मुरगावां के बड़े आदमी का पुत्र होने का संकेत दिया. खबर मिलने पर कामेश्वर सिंह उसे घर ले आये, लेकिन परिजनों ने उसे कन्हैया के रूप में नहीं पहचाना और न ही योगी किसी संबंधी या साथी के बारे में बता सका. इसके बावजूद कामेश्वर सिंह की जिद के कारण कन्हैया बना योगी दयानंद गोस्वामी उनके घर में ही रहने लगा और करोड़ों की संपत्ति का मालिक बन बैठा.

इसी बीच दयानंद ने तत्कालीन मुंगेर जिले (अब जमुई) के लखैया गांव में चिट्ठी भेज कर अपने लोगों को मुरगावां बुलाया. इसके बाद कुछ लोग भिखारी के रूप में आये, जिन्हें उसने खर्च भी दिया. वह कामेश्वर सिंह और उनकी पत्नी से बराबर बंदूक लेने का प्रयास करता था और रुपये लेते रहता था. वह लगभग 120 बीघे जमीन और अन्य संपत्ति लिखवाने की कोशिश करता रहता. इसी बीच रामसखी देवी ने उसकी साजिश को भांप दयानंद गोस्वामी के खिलाफ सिलाव थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. तब से यह मामला कोर्ट में चल रहा था.

Published By: Thakur Shaktilochan

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