5 बातें याद रख कर अपना अकाउंट खाली होने से बचाएं
Published by : Rajeev Kumar Updated At : 04 Jun 2026 7:20 PM
साइबर सुरक्षा टिप्स / सिम्बॉलिक पिक एआई से
ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और नकली लिंक के बढ़ते मामलों के बीच जानिए साइबर सुरक्षा के 7 महत्वपूर्ण नियम, जो आपके बैंक खाते और निजी जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं.
डिजिटल इंडिया के दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ा है. हर दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग फर्जी कॉल, नकली लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापनों और ऑनलाइन ऑफर्स के झांसे में आकर अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई गंवा देते हैं. खास बात यह है कि साइबर अपराधी अब पहले से ज्यादा चालाक हो चुके हैं और नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बना रहे हैं. ऐसे में खुद को सुरक्षित रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.
देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराध के मामले
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अपराधी कभी बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं, तो कभी पुलिस या सरकारी एजेंसी का नाम लेकर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं. कई बार सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन या भारी छूट वाले ऑफर दिखाकर भी लोगों को फंसाया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में थोड़ी सावधानी बरतकर ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है.
ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा न करें
साइबर सुरक्षा का सबसे पहला नियम है कि अपने ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन और बैंकिंग डिटेल्स किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें. बैंक, आरबीआई या कोई सरकारी एजेंसी कभी भी फोन करके ऐसी जानकारी नहीं मांगती. यदि कोई ऐसा करता है तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए.
फर्जी कॉल और लिंक से रहें सतर्क
साइबर अपराधी अक्सर फोन कॉल, एसएमएस या मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों तक पहुंचते हैं. अगर कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी बताकर जानकारी मांग रहा है, तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें. इसी तरह किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें क्योंकि एक गलत क्लिक आपके बैंक खाते और निजी जानकारी को खतरे में डाल सकता है.
सोशल मीडिया ऑफर्स और विज्ञापनों की जांच जरूरी
सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर दिखने वाले हर विज्ञापन पर भरोसा करना सही नहीं है. कई फर्जी वेबसाइट और नकली ऑफर्स लोगों को आकर्षित करने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं. किसी भी ऑफर का लाभ लेने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें. बेहद सस्ते दाम या असामान्य छूट वाले ऑफर्स अक्सर धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकते हैं.
वीडियो कॉल और डिजिटल अरेस्ट जैसे जाल से बचें
हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट और फर्जी वीडियो कॉल से जुड़ी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. साइबर अपराधी वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल को स्वीकार करने से बचें और किसी भी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें.
ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है, तो समय गंवाए बिना इसकी शिकायत करनी चाहिए. राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है. इसके अलावा साइबर क्राइम पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है. जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके खोज रहे हैं. ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है. यदि लोग इन सात संकल्पों को अपनी डिजिटल जिंदगी का हिस्सा बना लें, तो साइबर ठगी के अधिकांश मामलों से बचा जा सकता है.
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By Rajeev Kumar
राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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