पिचर्स 2 की शूटिंग के दौरान जितेंद्र को मिस किया लेकिन कहानी जरूरी होती है किरदार नहीं-नवीन कस्तूरिया

Published by :कोरी
Published at :23 Dec 2022 4:41 PM (IST)
विज्ञापन
पिचर्स 2 की शूटिंग के दौरान जितेंद्र को मिस किया लेकिन कहानी जरूरी होती है किरदार नहीं-नवीन कस्तूरिया

Pitchers 2: लोकप्रिय वेब सीरीज पिचर्स 2 का दूसरा सीजन दस्तक दे चुका है. नवीन बंसल के किरदार में अभिनेता नवीन कस्तूरिया एक बार फिर नजर आ रहे हैं. वह इस सीरीज को अपने कैरियर का पहला वो खास मुकाम मानते हैं. जिसने उन्हें आम से खास बना दिया था.

विज्ञापन

लोकप्रिय वेब सीरीज पिचर्स 2 का दूसरा सीजन दस्तक दे चुका है. नवीन बंसल के किरदार में अभिनेता नवीन कस्तूरिया एक बार फिर नजर आ रहे हैं. वह इस सीरीज को अपने कैरियर का पहला वो खास मुकाम मानते हैं. जिसने उन्हें आम से खास बना दिया था. वे बताते हैं कि पिचर्स के बाद लोग पहचानने लगे थे. कॉलेजों में हमें बुलाया जाता था. वहां बहुत स्पेशल ट्रीटमेंट मिलता था, सिक्योरिटी मिलती थी.लोग बस छूना चाहते थे. कई बार मिलने के बाद रोने भी लगते थे. यह अनुभव बहुत खास था. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश…

पिचर्स का पहला सीजन 2015 में आया था, उस वक़्त स्टार्टअप की दुनिया नयी थी, अब यह कांसेप्ट आम है, कितना इस बार लोग जुड़ाव महसूस करेंगे?

पहला सीजन जब आया था, तो मुझे भी लगा था कि इंजीनियर, एमबीए जैसे पढ़े -लिखे वालों के लिए ये शो है. उस वक़्त फ्लिपकार्ट, जोमाटो जैसे स्टार्टअप आ चुके थे, लेकिन फिर एक लो पीरियड स्टार्ट अप की दुनिया में आया, कई प्रोजेक्ट्स नहीं चलें, लेकिन फिर शार्क टैंक जैसे शो ने स्टार्टअप का फिर से पूल बना दिया है. मुझे लगता है कि पिचर्स का यह नया सीजन एकदम सही समय पर आया है. यह एंटरटेनमेंट के साथ -साथ अगर आपके दिल को छू जाता है, तो फिर बोनस है.

एक्टर के तौर पर अपनी जर्नी को इन दोनों सीजन्स के बीच आप किस तरह से परिभाषित करेंगे?

पिचर्स के पहले सीजन के बाद मैंने बहुत हाई पॉइंट देखा था. उसके बाद मेरा बहुत हाई पीरियड रहा.उसके बाद मेरे कुछ शोज को उतना अटेंशन नहीं मिला.एक दो फ़िल्में करी, लेकिन वो भी कुछ खास कमाल नहीं कर पायी. कुछ एक प्रोजेक्ट्स से लोगों का ध्यान फिर से खिंचा, लेकिन वापसी एसपिरेंट्स से हुई.उसके बाद ब्रीद में भी मेरे ट्विस्टेड किरदार को सराहा गया मुझे लगता है कि एक्टर जो है, वो स्क्रिप्ट पर भी निर्भर रहता है. स्क्रिप्ट अच्छी है, तो एक्टर भी अच्छा लगने लगता है.

सीजन वन का कोई ऐसा सीन था, जो आपके लिए चुनौतियों से भरा था?

मेरी एक स्पीच थी , जो बहुत पॉपुलर हुई थी. वो मुझे शूट के दो -तीन घंटे पहले ही मिली थी, तो एक चैलेंज तो था क्योंकि मैं उस तरह का एक्टर हूं, जिसकी चुनौती सबसे पहले लाइनों से शुरू होती हैं.मैं लाइनें सबसे पहले घोंटकर पी लेता हूं, क्योंकि लाइनों में एक बार सहज हो गया, तो मुझे समझ आ जाता है कि मैं इसे सच कैसे बना सकता हूं.अगर लाइनों में सहज नहीं हूं, तो वो किरदार में दिख जाएगा. वो जब होता है,तो मैं थोड़ा परेशान हो जाता हूं.तुरंत वो स्पीच मिली थी, तो मुश्किल हुई थी, शुक्र था कि सब अच्छे से हो गया.सीजन 2 में भी इस तरह की चुनौतियों की कमी नहीं थी, क्योंकि बहुत रिराइट हुआ था.कई बार अभी के अभी लाइनें मिली हैं और मुझे उसे तुरंत बोलनी थी.

इस सीजन जितेंद्र नहीं हैं, क्या इससे जिम्मेदारी आपकी और बढ़ गयी है?

कहानी सबसे महत्वपूर्ण होती है, किरदार नहीं हालांकि शूटिंग के दौरान हम सभी ने जितेंद्र को बहुत मिस किया. जहां तक जिम्मेदारी की बात है. कई बार आपके हाथ में आउटकम नहीं होता है. हमने बहुत ही मेहनत से बनाया तो है, लेकिन किसी शो को हिट बनाने में कई चीज़ें अहम होती हैं. कोई भी एक चीज कम रह गयी, तो फिर काम नहीं करता है.बहुत सारी चीजें एक साथ काम करती है तो ही शो कनेक्ट होता है. इतने सालों से एक्टर होने की वजह से ये ज़रूर हो गया है कि अब प्रैक्टिस हो गयी है कि रिजेक्शन के लिए भी तैयार रहता हूं.वैसे मैं एक अरसे से चाहता था कि मेरे शो के भी सीजन्स आए. सबके तीन से चार आ रहे हैं. वैसे मैंने जितना भी देखा है सभी की मेहनत दिखती है.मैं उम्मीद करता हूं कि जो भी बना है, वो लोगों को पसंद आए.

जैसा कि आपने कहा कि आपकी ख्वाहिश थी कि आपके शो के भी कई सीजन्स आए, कई बार बस पॉपुलारिटी को भुनाने के लिए शो बन जाते हैं?

जिस सिस्टम में हम काम कर रहे हैं, कई बार ऐसा होता है कि पहले सीजन के आते ही दूसरे सीजन की डेडलाइन चैनल द्वारा तय हो जाती है.ऐसे में राइटर्स पर दबाव बन जाता है, कम समय में डिलीवर करने का तो. कुछ भी कर लो, अगर आपकी स्क्रिप्ट में मज़ा नहीं है, तो फिर फिल्म या वेब सीरीज का अच्छा बनना मुश्किल है. राइटिंग में हमेशा तसल्ली से समय देना चाहिए. हमारे शो में तसल्ली से इस पर काम हुआ है.

यह शो रिस्क की बात करता है, आपकी जिंदगी के क्या रिस्क रहे हैं?

मैं रिस्क पर ही 14 साल से चल रहा हूं.मुझे आज भी नहीं पता रहता है कि मुझे कल क्या काम मिलने वाला है.2008 में मैंने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी थी. आज भी लोग जॉब छोड़ने से घबराते हैं, लेकिन मैं अभी भी रिस्क लेता रहता हूं. वैसे मैं इसे रिस्क से ज्यादा अपने शर्तों पर जीना कहूंगा.जब आप अनकन्वेशनल कुछ करते हो, तो दुनिया उसे रिस्क का ही नाम देती है, जैसे मैंने इंजीनियरिंग की थी, एक स्थायी जॉब में भी था और मिडिल क्लास परिवार से भी हूं. उस वक़्त ये बड़ी बात थी कि सब छोड़कर दिल्ली से मुंबई कोई फिल्मों में संघर्ष के लिए आ जाए. मुंबई में मेरा रिश्तेदार तो छोड़िए कोई दोस्त तक नहीं था. मैं एक स्टूडियो अपार्टमेंट में रहता था. एसपिरेंट्स के हिट हो जाने के बाद भी मुझे पता नहीं था कि मैं अब इसके बाद क्या करूँगा, तो पूरी अब तक की जिंदगी रिस्क पर टिकी है.

आपके परिवार वाले आपके अपने शर्तों पर जीने से कितना खुश हैं?

अब तो बहुत खुश हैं, मैं तो अपनी मां को छेड़ता भी रहता हूं कि आपके पति के साथ ऐसा कभी हुआ है कि लोग सेल्फी लेने के लिए घेर लें, शुरूआत के पांच सात साल वो घबराए हुए रहते थे. मेरी चाची का मुझे कॉल भी आता रहता था कि चलो हो गयी हॉबी वॉबी अब आप जाओ. दिल्ली में हमारी जॉइंट फैमिली है. हमारे परिवार में सभी इंजीनियर और डॉक्टर हैं. मैं खुद भी था. वैसे बीते कुछ सालों में मेरी ग्रोथ से वह खुश हैं.मुंबई में अपना घर ले लिया है. जो भी लोग मिलते हैं बहुत सम्मान देते हैं, तो घरवालों को अच्छा लगता है. अब तो घरवाले सपोर्ट भी करते हैं. एसपिरेंट्स की दिल्ली में शूटिंग हुई है, तो मैं अपनी लाइन्स को अपने पापा के साथ रिहर्स करता था. स्कूल में जैसे वे मेरी पढ़ाई के लिए जूनूनी हैं अब वो मेरे काम को लेकर हैं. वे चाहते हैं कि मैं और मेहनत करुं और बेस्ट दूं.

एक एक्टर के तौर पर आपकी अब विशलिस्ट क्या है?

हेलीकाप्टर, बंगले या महंगी गाड़ियों के फिलहाल कोई विशलिस्ट नहीं है. मैं अनुभव को जीना चाहता हूं,अलग अलग किरदारों के जरिए,मैं करना वो चाहता हूं, जिसमें मुझे मजा आए. एक्टिंग करनी है मतलब किसी भी किस्म की एक्टिंग करनी है ऐसा नहीं है. मुझे कहानी और मेरा रोल पसंद आना चाहिए. जो बहुत मुश्किल से होता है. अच्छी स्क्रिप्ट गिनी -चुनी होती है और वो मुझ तक पहुंच जाए. ये और मुश्किल है. अच्छी स्क्रिप्ट तक पहुंचने के लिए आपको कई बुरी स्क्रिप्ट को ना कहना होता है. पहले मुश्किल इसमें भी होती थी, लेकिन अब नहीं होती है.गलत प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर हर दिन सेट पर कुढ़ने से अच्छा है. उसे ना कह दो.

क्या एसपिरेंट्स का अगला सीजन भी दस्तक देने वाला है?

बनना तो चाहिए, लेकिन फिलहाल कुछ तय नहीं है. पिचर्स के सेकेंड सीजन की मैं कब से सोच रहा हूं और बना अभी लगभग सात साढ़े सात सालों बाद है.

विज्ञापन
कोरी

लेखक के बारे में

By कोरी

कोरी is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola