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गौरी लंकेश पर बने वृत्तचित्र को मानवाधिकारों का सर्वश्रेष्ठ फिल्म अवॉर्ड, कई फिल्म महोत्सव में होगी शामिल

Updated at : 20 Sep 2022 9:21 PM (IST)
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गौरी लंकेश पर बने वृत्तचित्र को मानवाधिकारों का सर्वश्रेष्ठ फिल्म अवॉर्ड, कई फिल्म महोत्सव में होगी शामिल

कविता लंकेश ने एक बयान में कहा कि वृत्तचित्र भारत में पत्रकारों के समक्ष हर दिन मौजूद खतरों को उजागर करता है. कविता ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत में पत्रकारों पर 200 से अधिक हमले हुए, जिनमें से 30 से अधिक पिछले दशक में हत्या के शिकार हुए.

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बेंगलुरु : दिवंगत पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश पर आधारित वृत्तचित्र ‘गौरी’ को टोरंटो महिला फिल्म महोत्सव-2022 में मानवाधिकारों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला है. इसका निर्देशन गौरी की बहन और पुरस्कार विजेता निर्देशक कविता लंकेश ने किया है. वृत्तचित्र को मॉन्ट्रियल के दक्षिण एशियाई फिल्म महोत्सव के लिए भी चुना गया है और डॉक न्यूयॉर्क, एम्स्टर्डम के अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र फिल्म महोत्सव, सनडांस फिल्म महोत्सव तथा दुनिया भर के अन्य महोत्सवों के लिए इस पर विचार किया जा रहा है.

पांच साल में 200 से अधिक पत्रकारों पर हमला

कविता लंकेश ने एक बयान में कहा कि वृत्तचित्र भारत में पत्रकारों के समक्ष हर दिन मौजूद खतरों को उजागर करता है. कविता ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत में पत्रकारों पर 200 से अधिक हमले हुए, जिनमें से 30 से अधिक पिछले दशक में हत्या के शिकार हुए. उन्होंने कहा कि ना केवल गंभीर हमले होते हैं, बल्कि उनके पीछे की मंशा भी स्पष्ट रहती है. उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत का स्थान 180 देशों में से 150 वां है.

फ्री प्रेस अनलिमिटेड का मिला साथ

कविता ने कहा कि दुर्भाग्य से असहमति की आवाज उठाने वालों और पत्रकारों पर हमले नए नहीं है और न ही भारत तक सीमित हैं, लेकिन पिछले दशक में जिस तरह हमले हुए हैं, वह चिंता पैदा करने वाली बात है. गौरी लंकेश की पांच सितंबर, 2017 की रात को बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. बयान के अनुसार, वृत्तचित्र ‘गौरी’ को फ्री प्रेस अनलिमिटेड, एम्स्टर्डम का भी साथ मिला है.

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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार

‘फ्री प्रेस अनलिमिटेड मिशन’ मानवाधिकारों के सार्वभौम घोषणा पत्र के अनुच्छेद 19 से प्रेरित है, जो कहता है कि सभी को राय प्रकट करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है. इस अधिकार में बिना किसी हस्तक्षेप के अपने विचार रखने और किसी भी मीडिया के माध्यम से और सीमाओं की परवाह किए बिना जानकारी और विचार प्राप्त करने व प्रदान करने की स्वतंत्रता शामिल है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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