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बेल ऑर्डर पर जिला जज के साइन नहीं, फिर भी आरोपी जेल से आया बाहर, ऐसे हुआ खुलासा

Updated at : 01 Dec 2020 11:11 AM (IST)
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बेल ऑर्डर पर जिला जज के साइन नहीं, फिर भी आरोपी जेल से आया बाहर, ऐसे हुआ खुलासा

रांची (शकील अख्तर) : पुलिस पर जानलेवा हमले और हथियार छीनने के आरोपी को दी गयी जमानत के मूल आदेश पर प्रधान जिला जज के हस्ताक्षर ही नहीं हैं. इसके बावजूद इसी आदेश के आलोक में जारी रिलीज ऑर्डर के आधार पर अभियुक्त जेल से बाहर निकल चुका है. मामला गिरिडीह सिविल कोर्ट से जुड़ा है. मामले का खुलासा तब हुआ, जब कोर्ट ने बिना दस्तखतवाले जमानत के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी जारी की. उसके बाद से ही यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.

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रांची (शकील अख्तर) : पुलिस पर जानलेवा हमले और हथियार छीनने के आरोपी को दी गयी जमानत के मूल आदेश पर प्रधान जिला जज के हस्ताक्षर ही नहीं हैं. इसके बावजूद इसी आदेश के आलोक में जारी रिलीज ऑर्डर के आधार पर अभियुक्त जेल से बाहर निकल चुका है. मामला गिरिडीह सिविल कोर्ट से जुड़ा है. मामले का खुलासा तब हुआ, जब कोर्ट ने बिना दस्तखतवाले जमानत के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी जारी की. उसके बाद से ही यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.

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वर्ष 2015 में गिरिडीह के जमुआ थाने में 30 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाते हुए इनके खिलाफ पुलिस पर हमला करने और हथियार छीनने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. इन अभियुक्तों में शामिल सुरेश सिंह 29 जून 2020 से जेल में था. निचली अदालत ने अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके बाद अभियुक्त की ओर से प्रधान जिला जज सह सत्र न्यायाधीश की अदालत में जमानत याचिका (488/2020) दायर की गयी.

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दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने 10-10 हजार रुपये के दो मुचलकों पर अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. 24 जुलाई 2020 को प्रधान जिला जज सह सत्र न्यायाधीश की अदालत से जमानत पर रिहा करने के आदेश की सूचना निचली अदालत को दी गयी. इस सूचना पर निचली अदालत ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और अभियुक्त को जेल से रिहा करने के लिए रिलीज ऑर्डर जारी किया. हालांकि, अब तक जमानत पर रिहा करने से संबंधित मूल आदेश पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दस्तखत ही नहीं किया है. इधर, संबंधित जज का तबादला भी हो चुका है.

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पुलिस की हिरासत में दहेज हत्या के एक अभियुक्त की मौत के बाद हंगामा हुआ था. दहेज हत्या का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने 23 नवंबर 2015 को अभियुक्त संजय यादव को गिरफ्तार किया था. पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो गयी. इसके बाद पुलिस लाश लेकर उसके गांव जा रही थी. पुलिस हिरासत में मौत की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने रास्ता रोक कर पुलिस पर अभियुक्त की हत्या का आरोप लगाया. इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच झड़प हुई. पुलिस द्वारा बल प्रयोग किये जाने के बाद मामला शांत हुआ. इसके बाद पुलिस ने अपने ऊपर जानलेवा हमला करने और हथियार छीनने के आरोप में जमुआ थाने में प्राथमिकी (322/2015) दर्ज की. इसमें चौकीदार द्वारा की गयी पहचान के आधार पर सुरेश सिंह समेत कुल 30 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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