बरेलीः 29 जून को मनाया जाएगा बकरीद, दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन ने की अपील- खुले में न फेंके जानवरों के अवशेष

Updated at : 27 Jun 2023 11:22 AM (IST)
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बरेलीः 29 जून को मनाया जाएगा बकरीद, दरगाह आला हजरत से जुड़े संगठन ने की अपील- खुले में न फेंके जानवरों के अवशेष

फरमान मियां ने बताया कि सुबह 6 बजे से 10 बजे तक ईद-उल-अज़हा की नमाज़ अदा की जाएगी. इसके बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू होगा. ईद-उल-अज़हा में मुसलमान तीन दिन अल्लाह की राह में कुर्बानी करते हैं. ये सिलसिला 29 जून को सूर्यादय से एक जुलाई को सूर्यास्त तक जारी रहेगा.

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बरेली: देश में ईद उल अजहा (बकरीद) 29 जून को है. लेकिन इससे पहले दरगाह आला हजरत के संगठन जमात रजा ए मुस्तफा के महासचिव फरमान हसन खां, (फरमान मियां) ने कुर्बानी को लेकर पैगाम जारी किया है.उन्होंने मुसलमानों से कुर्बानी के जानवर और उसकी कुर्बानी के दौरान के फोटो, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल न करने की बात कही. बोले, खुले में कुर्बानी बिल्कुल भी न करें.

क़ाज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रज़ा क़ादरी (असजद मियां) के फरमान मियां ने कहा कि इस बार हिंदुस्तान में ईद-उल-अज़हा का त्योहार देश भर में 29 जून यानी गुरुवार को मनाया जाएगा. उन्होंने सभी मुसलमानों से अपील कर कहा कि कुर्बानी किसी बंद जगह में करें. खुली जगह या सार्वजनिक स्थान पर हरगिज न करें. जानवरों के अपशिष्ट सामान (जो इस्तेमाल में नहीं आता). उसे गड्ढे खोद कर ज़मीन में दफन कर दें. इसके साथ ही खून नालियों में न बहे. इसका भी ख्याल रखने की बात कही.

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सुबह 6 बजे से होगी नमाज

फरमान मियां ने बताया कि सुबह 6 बजे से 10 बजे तक ईद-उल-अज़हा की नमाज़ अदा की जाएगी. इसके बाद कुर्बानी का सिलसिला शुरू होगा. ईद-उल-अज़हा में मुसलमान तीन दिन अल्लाह की राह में कुर्बानी करते हैं. ये सिलसिला 29 जून को सूर्यादय से एक जुलाई को सूर्यास्त तक जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि कुर्बानी करना हर मालिके निसाब(शरई मालदार) मुसलमान पर वाजिब है. यह त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और पैंगबर हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी के लिए याद किया जाता है.

कुर्बानी के लिए तीन दिन है खास

इस्लामी माह जिलहिज्जा की 10,11 और 12 तारीख कुर्बानी के लिए खास दिन है. कुर्बानी में भेड़, बकरा, बकरी,दुम्बा सिर्फ एक आदमी की तरफ से एक जानवर होना चाहिए. मगर, बड़े जानवर में सात लोग शिरकत कर सकते हैं. कुर्बानी के बाद उसके गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. शरीयत के अनुसार गोश्त का एक हिस्सा गरीबों में, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और तीसरा हिस्सा अपने घर वालों के लिए रखने का हुक़्म है.

रिपोर्ट मुहम्मद साजिद, बरेली

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