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झारखंड : पश्चिमी सिंहभूम के रांचीसाई में धूमधाम से मना बाहा पर्व, मांदर की थाप पर झूमे लोग

Updated at : 07 Mar 2023 6:23 PM (IST)
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झारखंड : पश्चिमी सिंहभूम के रांचीसाई में धूमधाम से मना बाहा पर्व, मांदर की थाप पर झूमे लोग

आदिवासी समुदाय के लोग धूमधाम से बाहा पर्व मनाएं. इस दौरान पारंपरिक परिधानों में मरांग बुरु जाहेर थान की विधिवत पूजा-अर्चना कर गांव-समाज की शांति की कामना करते हुए बारिश, अच्छी फसल और महामारी से बचाव के लिए प्रार्थना की गयी. वहीं, मांदर की थाप पर जमकर झूमते दिखे.

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बंदगांव (पश्चिमी सिंहभूम), अनिल तिवारी : पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत बंदगांव की हुडंगदा पंचायत स्थित रांचीसाई गांव में संताली और आदिवासी समाज की ओर से बाहा पर्व धूमधाम से मनाया गया. सबसे पहले गांव के सभी लोग सुबह में पुजारी लखन गागराई के घर जमा हुए. पुजारी को ग्रामीण मांदर की थाप पर नाचते हुए जाहेर थान लाए. वहां सखुआ के पेड़ के नीचे पुजारी ने मरांग बुरु जाहेर थान की विधिवत पूजा-अर्चना की. साथ ही गांव-समाज की सुख शांति के लिए प्रार्थना किया. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

मांदर की थाप पर झूमे लोग

कार्यक्रम में पुरुषों के मांदर की थाप पर महिलाएं एवं युवतियों ने भी जमकर पारंपरिक नृत्य किया. वहीं, महिलाओं ने हाथ जोड़कर कदम से कदम मिलाते हुए पारंपरिक गीतों पर खूब नृत्य कर समां बांध दिया. नृत्य-संगीत का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा. पुजारी ने पूजा के बाद सखुआ का फूल प्रसाद के रूप में सभी को दिया.

सोहराय के बाद दूसरा बड़ा पर्व है बाहा

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पीपुल्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव विजय सिंह गागराई ने कहा कि बाहा संताल और आदिवासियों का सोहराय के बाद दूसरा बड़ा पर्व है. संताली लोग इस पर्व को बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. यह पर्व पतझड़ के बाद पेड़ों में नई पत्तियों एवं फूल के आने की खुशी में मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि मान्यता है कि हिन्दी नववर्ष के स्वागत के लिए प्रकृति भी पूरी पृथ्वी को सजाती है. आदिवासी समाज भी प्रकृति के साथ इस खुशी में शामिल होते हैँ. कार्यक्रम में मुखिया प्रतिनिधि राजेश गागराई, किरण गागराई, मुंडा जुनुल बोदरा समेत काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

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क्या है बाहा पर्व

बाहा पोरोब यानी बाहा पर्व संताल, उरांव, मुंडा समेत अन्य जनजातियों का पर्व है. बाहा का अर्थ फूल होता है. इस पर्व में महिला-पुरुष के साथ-साथ बच्चे परंपरागत कपड़े पहनकर मांदर की थाप पर खूब झूमते हैं.

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