शहीद पिता को मुखाग्नि देते ही फफक कर रोने लगा मासूम सूरज, पंचतत्व में विलीन लवकुश के नाम पर होगा गांव के स्कूल का नामकरण
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Aug 2020 7:48 PM
रतनी : जम्मू-कश्मीर के बारामूला में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान लवकुश शर्मा का अंतिम संस्कार बुधवार को उनके पैतृक गांव अइरा में राजकीय सम्मान के साथ किया गया. शहीद जवान के सात वर्षीय पुत्र ने मुखाग्नि देते ही फफक कर रोने लगा, जिससे दुख का माहौल और भी कारुणिक हो गया. मुखाग्नि देने से पूर्व शहीद जवान को अंतिम सलामी दी गयी.
रतनी : जम्मू-कश्मीर के बारामूला में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान लवकुश शर्मा का अंतिम संस्कार बुधवार को उनके पैतृक गांव अइरा में राजकीय सम्मान के साथ किया गया. शहीद जवान के सात वर्षीय पुत्र ने मुखाग्नि देते ही फफक कर रोने लगा, जिससे दुख का माहौल और भी कारुणिक हो गया. मुखाग्नि देने से पूर्व शहीद जवान को अंतिम सलामी दी गयी.

शहीद की विधवा जब पति को सलामी देने पहुंची, तब पूरा माहौल करुणा के सागर में डूब गया. हर किसी की आंखें नम हो गयीं. वहीं, शहीद के पिता ने वीर सपूत की शहादत को नमन करते हुए देश पर उसके बलिदान पर गर्व किया. शहीद जवान के अंतिम दर्शन करने तथा उसकी शहादत को नमन करने पहुंचे हजारों लोगों की आंखें नम रहीं. शहीद जवान के अंतिम संस्कार से पूर्व उसे 36 राउंड गोलियों से सलामी दी गयी.

सबसे अधिक कारुणिक माहौल उससमय रहा, जब शहीद के पिता को तिरंगा झंडा सौंपा गया. देश की सेवा करते-करते वीरगति को प्राप्त हुए माटी के लाल लवकुश शर्मा का अंत्येष्टि संस्कार पैतृक गांव अइरा में संपन्न हो गया. राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान सीआरपीएफ के जोनल डीआइजी संजय कुमार व निशित कुमार के नेतृत्व में अंतिम सलामी दी गयी. मातमी धुन पर 36 राउंड गोलियों से पार्थिव शरीर को सलामी दी गयी. इसके बाद पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया.
सात साल के बेटे सूरज ने पिता को जैसे ही मुखाग्नि दी, वहां पर खड़े लोगों की आंखें नम हो गयीं. हर कोई मनहूस घड़ी को कोस रहा था. अंतिम संस्कार के लिए जब शहीद के साथ आये जवानों ने घर से पार्थिव शरीर उठाने के लिए प्रयास किये, तो पत्नी बेसुध होकर पति के पार्थिव शरीर से लिपटी रही. जब भी जवान लोग पार्थिव शरीर उठाने के लिए प्रयास करते तो पत्नी दो मिनट और कह कर उन्हें रोक देती.
हृदय विदारक इस घटना से वहां पर खड़े लोगों का भी धैर्य जवाब देते रहा. किसी तरह समझा-बुझाकर सीआरपीएफ के साथियों ने पार्थिव शरीर को उठा कर अंतिम सलामी के लिए लाने लगे, तो हजारों की भीड़ साथ नारा लगाते चल पड़ी. लवकुश शर्मा अमर रहे के गगनभेदी नारों से गूंजते रहा.
जैसे ही पार्थिव शरीर की सलामी के लिए अंत्येष्टि स्थल के समीप लाया गया, तो वहां पर अंत्येष्टि कार्यक्रम में उपस्थित बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नंदन प्रसाद वर्मा, सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, पूर्व मंत्री प्रो रामजतन सिन्हा, विधायक सुदय यादव, पूर्व सांसद अरुण कुमार, राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, पूर्व विधायक अभिराम शर्मा, पूर्व विधायक अरवल चितरंजन शर्मा, पूर्व विधायक डॉ मुन्नीलाल यादव, पूर्व विधान पार्षद राधामोहन शर्मा, जिप सदस्या सुनीता कुमारी, जदयू नेता शशिभूषण कुमार उर्फ गोपाल शर्मा, समाजसेवी निरंजन केशव उर्फ प्रिंस कुमार, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष शशिरंजन कुमार ने पार्थिव शरीर को पुष्पांजलि दी. इसके बाद शव का अंतिम संस्कार किया गया.
शहीद सीआरपीएफ जवान के अंतिम संस्कार के मौके पर राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार शहीद के परिजनों को हर संभव सहायता मुहैया करायेगी. उन्होंने गांव के स्कूल का नाम शहीद लवकुश शर्मा के नाम पर करने की जानकारी दी. साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शहीद के परिवार को 11 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दिया जायेगा. इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष से शहीद के परिवार को 25 लाख रुपये दिये जायेंगे. शहीद के परिवार के एक आश्रित को राज्य सरकार द्वारा नौकरी दी जायेगी.
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