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बिहार की कवयित्री अनामिका अनु को मिला महेश अंजुम युवा कविता सम्मान, कहा-सृजनात्मकता बढ़ेगी

Updated at : 03 Jul 2023 6:05 PM (IST)
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बिहार की कवयित्री अनामिका अनु को मिला महेश अंजुम युवा कविता सम्मान, कहा-सृजनात्मकता बढ़ेगी

पुरस्कार की घोषणा के बाद प्रभात खबर से बातचीत करते हुए अनामिका अनु ने कहा कि 'इंजीकरी' मेरा पहला काव्यसंग्रह है और इसे मिला सम्मान मेरी सृजनात्मक कोशिशों को धनात्मक ऊर्जा प्रदान करेगी. निश्चित तौर पर बेहद खुशी मिली है.

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केदार स्मृति न्यास,बांदा ने साल 2023 का ‘महेश अंजुम युवा कविता सम्मान ‘ हिंदी की युवा कवयित्री अनामिका अनु को देने की घोषणा की है. इस पुरस्कार की घोषणा के बाद प्रभात खबर से बातचीत करते हुए अनामिका अनु ने कहा कि ‘इंजीकरी’ मेरा पहला काव्यसंग्रह है और इसे मिला सम्मान, मेरी सृजनात्मक कोशिशों को धनात्मक ऊर्जा प्रदान करेगी. निश्चित तौर पर बेहद खुशी मिली है.

केदार स्मृति न्यास की ओर से कहा गया है कि अनामिका अनु जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को आत्मीयता और तीव्रतम अभिव्यक्ति के साथ अपनी कविताओं में गढ़ती हैं. उनकी कविताओं का शिल्प उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है. उनकी कविताओं में एक ओर तो समय की जड़ता को तोड़ने की क्षमता है,वहीं दूसरी ओर एक नयी दुनिया बनाने की चेतना भी है.

वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुई है ‘इंजीकरी’

‘महेश अंजुम युवा कविता सम्मान’ 2023 के इस निर्णायक मंडल में गोपेश्वर सिंह, प्रेमकुमार मणि, देवेंद्र चौबे और कुसुमलता सिंह शामिल थे. अनामिका अनु के काव्यसंग्रह ‘इंजीकरी’ को वाणी प्रकाशन और रज़ा फाउंडेशन के सहयोग से प्रकाशित किया गया है.

भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से भी हो चुकी हैं सम्मानित

गौरतलब है कि अनामिका अनु को साल 2020 में उनकी कविता ‘मां अकेली रह गयी ‘के लिए प्रतिष्ठित ‘भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है. वहीं साल 2021 में अनामिका अनु को राजस्थान पत्रिका का वार्षिक सृजनात्मक पुरस्कार भी उनकी कविता प्रवासी प्रिय के लिए दिया गया है.

यारेख हाल ही में प्रकाशित पुस्तक

हाल ही में अनामिका अनु के संपादन में ‘यारेख’ नाम की पुस्तक प्रकाशित हुई है, जिसके प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस और हिंद पाॅकेट बुक्स हैं. इसमें 36 रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं. जल्दी ही राजकमल प्रकाशन से उनके द्वारा अनुदित कविताओं का संकलन ‘सिद्धार्थ और गिलहरी’ भी प्रकाशित होने वाली है. अनामिका अनु मूलत: बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं. लेकिन वर्तमान में वे केरल में रहती हैं. डाॅ अनामिका अनु की रचनाओं का अनुवाद पंजाबी,मलयालम,मराठी,नेपाली, अंग्रेजी सहित अन्य कई भाषाओं में हो चुका है.

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