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Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश- बचपन के अपराध की वजह से जॉइनिंग नहीं रोक सकते

Updated at : 21 May 2022 5:17 PM (IST)
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Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश- बचपन के अपराध की वजह से जॉइनिंग नहीं रोक सकते

Prayagraj News: बचपन में किए गए अपराध के आधार पर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि बचपन में किए अपराध के आधार पर किसी की नौकरी में जॉइनिंग से रोकना गलत है.

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Prayagraj News: बचपन में किए गए अपराध के आधार पर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि बचपन में किए अपराध के आधार पर किसी की नौकरी में जॉइनिंग से रोकना गलत है. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि किशोर न्याय अधिनियम का उद्देश्य है कि किशोर को समाज में एक सामान्य व्यक्ति के रूप में वापस स्थापित करने के लिए खास कंडीशन में बच्चे के सभी पिछले रिकार्ड मिटा दिए जाने चाहिए. ताकि किशोर के रूप में किए गए किसी भी अपराध के संबंध में कोई कलंक न रह जाए. यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने सोरांव निवासी अभिषेक कुमार यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है.

प्रयागराज के सोरांव निवासी याची अभिषेक कुमार यादव के ऊपर सोरांव थाने में 2010 में केस दर्ज किया गया था.बाद में उसे आरोपों से बरी कर दिया गया था. याची ने रक्षा मंत्रालय विभाग के कंटीन स्टोर इकाई की ओर से कनिष्ट श्रेणी क्लर्क के लिए आवेदन किया और वह सेलेक्ट भी हो गया था. याची ने सत्यापन के दौरान अपने खिलाफ दर्ज FIR के बारे में जानकारी दी तो रक्षा मंत्रालय ने उनकी जॉइनिंग को निरस्त दिया.

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इसके बाद याची ने रक्षा मंत्रालय के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी. प्रतिवादी की तरफ से याची पर आवेदन के दौरान एफ आई आर की जानकारी छुपाने को लेकर सवाल खड़े किए गए. कहा गया कि याची ने आवेदन के दौरान एफआईआर के बारे में जानकारी नहीं दी थी. प्रतिवादी ने हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा अवतार सिंह के मामले में दिए गए आदेश का हवाला देते हुए कहा कि याचिका खारिज करने योग्य है. कोर्ट ने कहा कि याची किशोर था.

उसके बाद याची ने रक्षा मंत्रालय के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. प्रतिवादी की तरह से उसकी सत्यनिष्ठा पर सवाल खड़े किए गए. कहा गया कि आवेदन करते समय अपने हलफनामें में याची ने अपने खिलाफ दर्ज FIR की जानकारी का खुलासा नहीं किया. प्रतिवादी की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवतार सिंह के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया और कहा याचिका खारिज किए जाने योग्य है.लेकिन कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के आदेश को गलत बताते हुए कहा कि याची किशोर था.

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