फ्रिज कूलिंग नहीं कर रहा तो गैस या कंप्रेसर को दोष न दें, ₹10 के नोट से पकड़ें असली खराबी
फ्रिज के दरवाजे की रबर गैस्केट को चेक करता एक आदमी (फोटो: AI-Generated)
फ्रिज की कूलिंग कम होने पर हर बार गैस या कंप्रेसर खराब नहीं होता. दरवाजे की रबर गैस्केट ढीली या खराब होने से भी ठंडी हवा बाहर निकल सकती है. ₹10 के नोट से इसकी सीलिंग चेक की जा सकती है. आइए डिटेल में जानते हैं इसके बारे में.
अक्सर फ्रिज ठीक से कूलिंग करना बंद कर दे तो हमें लगता है कि कंप्रेसर खराब हो गया है या गैस खत्म हो गई है. इसके बाद टेक्नीशियन को बुलाया जाता है और कई बार गैस रिफिल के नाम पर ₹3,000 से ₹6,000 तक का खर्च बता दिया जाता है. लेकिन हर बार प्रॉब्लम गैस या कंप्रेसर की ही हो, ऐसा जरूरी नहीं. कई मामलों में असली दिक्कत फ्रिज के दरवाजे पर लगी रबर गैस्केट की होती है. यही रबर स्ट्रिप दरवाजे को अच्छी तरह सील रखती है, ताकि अंदर की ठंडी हवा बाहर न निकले.
समय के साथ अगर यह गैस्केट सख्त, ढीली या कहीं से फट जाए, तो ठंडी हवा बाहर निकलने लगती है. नतीजा यह होता है कि फ्रिज का कंप्रेसर ज्यादा देर तक चलता रहता है, बिजली की खपत बढ़ जाती है और फ्रिज ठीक से ठंडा भी नहीं कर पाता.
कैसे पता लगाएं फ्रिज की रबर सील ढीली तो नहीं?
फ्रिज के दरवाजे की सील ठीक है या नहीं, यह चेक करने का सबसे आसान तरीका है करेंसी नोट वाला टेस्ट. इसके लिए ₹10 या ₹100 का एक नोट दरवाजे के बीच में फंसाएं, ताकि उसका आधा हिस्सा बाहर रहे. अब नोट को बाहर खींचने की कोशिश करें. अगर नोट बिना किसी खास रुकावट के आसानी से निकल जाता है, तो समझिए कि दरवाजे की रबर सील की पकड़ कमजोर हो गई है और ठंडी हवा बाहर निकल रही है.
यह टेस्ट सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि दरवाजे के अलग-अलग हिस्सों पर करके देखें. खासकर कोनों और नीचे के हिस्से को जरूर चेक करें, क्योंकि यहां रबर बार-बार खिंचने की वजह से जल्दी ढीली पड़ सकती है.
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फ्रिज की रबर सील क्यों जल्दी खराब होती है?
फ्रिज का दरवाजा दिन में न जाने कितनी बार खुलता-बंद होता है. हर बार टेम्परेचर में होने वाले बदलाव का असर दरवाजे पर लगी रबर गैस्केट पर पड़ता है. करीब 3 से 5 साल में यह रबर धीरे-धीरे अपनी लचक खोने लगती है. इसके अलावा, सील के किनारों पर जमा खाने के टुकड़े, धूल और चिकनाई भी इसे फ्रिज के फ्रेम से ठीक तरह चिपकने नहीं देते.
भारतीय किचन में यह प्रॉब्लम और जल्दी दिख सकती है. यहां फ्रिज दिनभर कई बार खोला जाता है और साल के कई महीनों तक नमी भी ज्यादा रहती है. ऐसे में रबर सील की हालत मैनुअल में बताए गए समय से पहले ही खराब होने लगती है.
गैस्केट गंदा है तो ऐसे करें साफ, खराब है तो बदलें
अगर गैस्केट सिर्फ गंदा हुआ है और उसमें कोई टूट-फूट नहीं है, तो उसे बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. पहले इसे गुनगुने पानी और हल्के साबुन से अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद थोड़ा-सा पेट्रोलियम जेली लगा दें. इससे गैस्केट की लचक वापस आ सकती है और सीलिंग भी बेहतर हो जाएगी. लेकिन अगर गैस्केट में दरार दिख रही है या वह अपनी जगह से ढीला पड़ गया है, तो इसे बदलना ही बेहतर रहेगा. ज्यादातर बड़े रेफ्रिजरेटर ब्रांड्स के गैस्केट किट ऑनलाइन या कंपनी के सर्विस सेंटर से करीब 400 से 1,200 रुपये में मिल जाते हैं.
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By अंकित आनंद
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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.
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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.
उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.
पढ़ाई और करियर
बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.
प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.
विजन
अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.
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