लोहा या प्लास्टिक कौन सा कूलर देता है अच्छी हवा? खरीदते वक्त जरूर रखना ध्यान

Published by : Shivani Shah Updated At : 04 Jun 2025 1:04 PM

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Cooler Tips: अगर आप कूलर खरीदने कि सोच रहे हैं लेकिन इस बात से कन्फ्यूज हैं कि लोहा या प्लास्टिक कौन स कूलर खरीदना बेस्ट रहेगा तो फिर ये खबर जरूर पढ़िएगा. क्योंकि, आज हम आपको बताएंगे दोनों कूलर्स के खूबियां और खामियां.

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Cooler Tips: ऐसे तो मार्केट में लोहे से लेकर प्लास्टिक वाले कूलर आपको मिल जाएंगे. अलग-अलग डिजाइन से लेकर बढ़िया क्वालिटी वाले. लेकिन किसी कूलर का डिजाइन कितना भी अच्छा क्यों न हो लोग अक्सर एक ही सवाल में आकर फंस जाते हैं कि आखिर लोहा वाला कूलर लेना सही है या फिर प्लास्टिक का. लोहा वाला कूलर ज्यादा हवा देगा या फिर प्लास्टिक वाला. अगर आप भी इस सवाल में उलझे हुए हैं तो चिंता मत करिए. क्योंकि, आज हम आपकी इस उलझन को सुलझाने वाले हैं. आज हम आपको बताएंगे कि कौन सा कूलर ज्यादा अच्छी हवा देगा और किसे खरीदने में समझदारी होगी.

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लोहे वाला कूलर

ज्यादातर मार्केट में लोहे वाला कूलर देखने को मिलता है. वहीं, ज्यादातर लोग भी लोहे वाला कूलर ही खरीदते हैं. लोहे वाले कूलर की खूबियों कि बात करें तो इसमें ज्यादा कैपेसिटी वाले मोटर और पंखे लगे होते हैं. जिससे ज्यादा अच्छी और ठंडी हवा आती है. साथ ही इसमें ज्यादा पानी की कैपेसिटी भी होती है. यानी कि एक बार पानी डालो तो दिन भर पानी डालने की टेंशन नहीं. इसके अलावा लोहे वाले कूलर के पंखे ज्यादा स्पीड चलते हैं, जिससे कमरा जल्दी ठंडा हो जाता है. वहीं, ये ज्यादा टिकाऊ भी होते हैं.

वहीं, लोहे वाले कूलर की खामियों कि बात करें तो लोहे के कूलरों में जल्दी जंग लग जाती है. प्लास्टिक वाले कूलरों कि तुलना में ये ज्यादा शोर भी करते हैं. साथ ही इसे एक जगह सेट करना पड़ता है और ये वजन में भारी भी होते हैं. जिससे जरूरत पड़ने पर इसे दूसरी जगह रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लोहे वाले कूलर को चलाने में ज्यादा बिजली की खपत होती है. जिससे ज्यादा बिजली बिल आता है. इसके अलावा लोहे की बॉडी होने के कारण इससे करंट लगने का डर भी रहता है.

प्लास्टिक वाला कूलर

वहीं, प्लास्टिक कूलर्स की खूबियों कि बात करें तो प्लास्टिक वाले कूलर आपको कई डिजाइन, साइज और क्वालिटी के मिल जाएंगे. प्लास्टिक कूलर्स की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये वजन में हल्के होते हैं. जिससे आप इसे आसानी से कहीं भी रख सकते हैं. दूसरी खासियत ये है कि प्लास्टिक वाले कूलर को चलाने में कम बिजली की खपत होती है. जिससे ज्यादा बिजली बिल आने की टेंशन नहीं रहती. प्लास्टिक का होने के कारण इसमें जंग लगने की टेंशन भी नहीं होती. जिससे इसका इस्तेमाल कई सालों तक किया जा सकता है. इसका रख-रखाव भी लोहे वाले कूलर से ज्यादा आसान है. साथ ही प्लास्टिक वाले कूलर लोहे के कूलर की तुलना में कम आवाज करते हैं और इन्हें साफ करना भी आसान है.

वहीं, प्लास्टिक कूलर्स की खामियों कि बात करें तो प्लास्टिक वाले कूलर लोहे वाले कूलर्स की तुलना में उतनी स्पीड हवा नहीं फेंकते. यानी कि बड़े कमरे को ठंडा करने में प्लास्टिक के कूलर ज्यादा समय लेते हैं. प्लास्टिक वाले कूलर्स में ज्यादा कैपेसिटी वाले मोटर और पंखे नहीं होते. ऐसे में एयर फ्लो भी कम होता है.

कौन सा खरीदना रहेगा ज्यादा अच्छा?

अगर आप सिर्फ ठंडी हवा के लिए कूलर खरीद रहे हैं तो फिर इस हिसाब से आपके लिए लोहे वाला कूलर बेस्ट रहेगा. लेकिन अगर आप बजट को देख कर कूलर खरीदना चाहते हैं तो फिर आपके लिए प्लास्टिक वाला कूलर सही रहेगा. ऐसे तो दोनों ही कूलर के अपने-अपने फायदे हैं. लेकिन कूलर्स को खरीदते वक्त आप अपने जरूरत और बजट का ध्यान रख कर ही इन्हें खरीदें.

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शिवानी कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर टेक-ऑटो कंटेंट राइटर हैं और डिजिटल मीडिया में वह 3 सालों से सक्रिय हैं. वह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं. वह आसान भाषा और साफ तरीके से खबर लिखती हैं. टेक कैटेगरी में वह स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल ट्रेंड्स जैसे टॉपिक्स पर खबर लिखती हैं. ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी शिवानी नई कार-बाइक लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ऑटो अपडेट्स, कार और बाइक से जुड़े टिप्स व नई तकनीक पर खबरें लिखती हैं. वह टेक और ऑटो की खबरों को आसान तरीके से पेश करती हैं, ताकि हर रीडर उसे आसानी से समझ सके. उनकी लेखन शैली आसान, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है. शिवानी ने करीम सिटी कॉलेज जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. इसके बाद उन्होंने अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से पत्रकारिता में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे कंटेन्ट राइटिंग की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिवानी ने Lagatar.Com और The News Post जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है. यहां उन्होंने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और अन्य न्यूज बीट पर कंटेंट तैयार किया. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में उनकी खास रुचि है और वह लगातार नए विषयों पर बेहतर और भरोसेमंद कंटेंट तैयार कर रही हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शिवानी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि रीडर्स तक सही, काम की खबरें और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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