आधार पहचान पर एआई स्कैमर्स का हमला, सोशल मीडिया फोटो से बने डीपफेक

Author :Rajeev Kumar
Published by :Rajeev Kumar
Updated at :09 May 2026 3:20 PM
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Aadhaar Scam

Aadhaar Card / file photo

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एआई डीपफेक वीडियो से आधार पहचान हाइजैक करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया. मोबाइल नंबर बदलकर अपराधियों ने बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बनाई और लाखों रुपये के लोन ठगे.

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भारत में डिजिटल पहचान की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो एआई-जेनरेटेड डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल कर आधार से जुड़ी पहचानें हाइजैक कर रहा था. इस हाई-टेक धोखाधड़ी ने न केवल आम लोगों बल्कि अनुभवी साइबर विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है.

कैसे हुआ आधार डेटा का दुरुपयोग

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने पहले ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स से आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्तियों की पहचान की. इसके बाद Telegram बॉट्स और डिजिटल टूल्स के जरिए आधार से जुड़ी जानकारी और सोशल मीडिया से तस्वीरें जुटाईं. इन्हीं तस्वीरों को एआई सॉफ्टवेयर से ब्लिंकिंग डीपफेक वीडियो में बदला गया, जो असली इंसानी भाव-भंगिमा की तरह दिखते थे. इन वीडियो का इस्तेमाल कर अपराधियों ने आधार वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा दिया और पीड़ितों के मोबाइल नंबर बदल दिए.

मोबाइल नंबर बदलकर मिली पूरी डिजिटल पहुंच

जैसे ही आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदला गया, अपराधियों को बैंकिंग अलर्ट, डिजिटल लॉकर और अन्य सेवाओं तक पहुंच मिल गई. इसके बाद उन्होंने नए सिम कार्ड और बैंक अकाउंट खोलकर ₹25,000 से ₹50,000 तक के त्वरित पर्सनल लोन हासिल किए. पैसे को कई खातों में घुमाकर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की गई.

कैसे खुला राज

यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब अहमदाबाद के एक बिजनेसमैन को अपने आधार-लिंक्ड ट्रांजैक्शंस के लिए OTP मिलना बंद हो गया. जांच में पता चला कि उनका मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक डेटा बिना किसी OTP वेरिफिकेशन के बदल दिया गया था और उनके नाम पर लोन भी ले लिया गया था.

जांच और गिरफ्तारियां

अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि असम का मुख्य आरोपी ओली उल्लाह फरार है. पुलिस ने बताया कि गिरोह ने Common Service Centres (CSCs) का इस्तेमाल कर आधार मोबाइल नंबर में बदलाव किया. तकनीकी हेड रब्बुल हुसैन को भी पकड़ा गया है, जो एआई रिसोर्सेज और आइडेंटिटी थेफ्ट ऑपरेशंस संभाल रहा था.

डिजिटल पहचान पर खतरे की घंटी

यह केस भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली में मौजूद गंभीर कमजोरियों को उजागर करता है. अधिकारियों ने UIDAI को इन खामियों के बारे में सतर्क किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें अब साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान हथियार बन चुकी हैं. ऐसे में डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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