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Netflix, Amazon जैसों के ऑनलाइन कंटेंट भी अब आये सरकार की निगरानी में, विरोध शुरू, अब आगे क्या होगा?

By Prabhat khabar Digital
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Netflix Amazon Prime and other OTT platforms under Govt Regulation
Netflix Amazon Prime and other OTT platforms under Govt Regulation
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Netflix Amazon Prime OTT Online Content Under I&B Ministry: भारत सरकार ने ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडर्स और ऑनलाइन न्यूज पोर्टल्स को रेग्यूलेट करने को लेकर आदेश जारी किया है. सूचना प्रसारण मंत्रालय की नजर अब ऑनलाइन पोर्टल्स और नेटफ्लिक्स (netflix) या अमेजन प्राइम (amazon) जैसे OTT (Over the Top) स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी रहेगी. सरकार ने बुधवार को एक गैजेट जारी करके इसे नोटिफाई किया है.

मतलब यह कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जा रहे डिजिटल ऑडियो विजुअल कंटेंट और वेब शो को अपने दायरे में ले लिया है. इसके साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के न्यूज और करेंट अफेयर्स भी अब सरकार के दायरे में होगा. यानी अब OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले वीडियो, फिल्मों और वेब सीरीज के लिए मंत्रालय से अनुमति लेना होगी.

नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब सभी ऑनलाइन पोर्टल्स सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन होंगे यानी मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार ही काम करेंगे. ऑनलाइन पोर्टल्स के साथ ही कंटेंट प्रोवाइडर्स, ऑनलाइन फिल्म्स और ऑडियो विजुअल प्रोग्राम्स पर भी यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है.

इस बदलाव के मायने ये हैं कि अब नेटफ्लिक्स जैसे OTT प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप लागू होगा. बता दें कि अभी देश में लगभग 15 वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स काम कर रहे हैं. नयी व्यवइसमें जो OTT प्लेटफॉर्म शामिल होंगे उनमें नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम वीडियो, डिज्नी + हॉटस्टार, ALT बालाजी, ZEE5, Arre, डिस्कवरी +, इरोज नाउ, फ्लिकस्ट्री (Flickstree), होईचोई (Hoichoi), हंगामा, MX प्लेयर, शेमारू, VOOT, Jio सिनेमा, सोनीLiv और Lionsgate play शामिल है.

सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. लेखकों और निर्देशकों के एक तबके ने कहा है कि ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफॉर्म को सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाये जाने के निर्णय से वैश्विक स्तर पर भारतीय कंटेंट क्रिएटरों को नुकसान हो सकता है और इससे निर्माताओं और यहां तक कि दर्शकों की रचनात्मक एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है.

नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और डिज्नी + हॉटस्टार जैसे ओटीटी मंचों तथा ऑनलाइन समाचार एवं समसामयिक मामलों से जुड़ी सामग्री को मंत्रालय के दायरे में लाये जाने के फैसले पर निराशा व्यक्त करने वालों में हंसल मेहता और रीमा कागती जैसे फिल्मकार शामिल हैं. फिल्म निर्माता हंसल मेहता ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर आघात बताया है.

वहीं, कागती ने कहा कि हालांकि सेंसरशिप के बारे में कुछ खास नहीं कहा गया है, सिवाय इसके कि यह सूचना और प्रसारण मंत्रालय के दायरे में आ गया है. यह देखने के लिए इंतजार करना चाहिए कि वास्तव में इसका क्या तात्पर्य है. निर्देशक एवं लेखक अंशुमन ने फैसले को अस्वीकार्य बताया और दर्शकों तथा क्रिएटरों से इसे चुनौती देने की अपील की.

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