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WhatsApp, Facebook, Telegram और Netflix जैसे OTT प्लेटफॉर्म को TRAI ने दी राहत, जानें पूरा मामला

Updated at : 15 Sep 2020 4:07 PM (IST)
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WhatsApp, Facebook, Telegram और Netflix जैसे OTT प्लेटफॉर्म को TRAI ने दी राहत, जानें पूरा मामला

TRAI, WhatsApp, Netflix, OTT : भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) की तरफ से Facebook, WhatsApp, Google, Viber, Telegram और Netflix जैसे OTT (over the top) प्लेटफॉर्म को बड़ी राहत दी गई है. TRAI ने OTT संचार सेवा प्रदाताओं के लिए तत्काल कोई नियामकीय (regulatory) हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.

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TRAI, WhatsApp, Netflix, OTT : भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) की तरफ से Facebook, WhatsApp, Google, Viber, Telegram और Netflix जैसे OTT (over the top) प्लेटफॉर्म को बड़ी राहत दी गई है. TRAI ने OTT संचार सेवा प्रदाताओं के लिए तत्काल कोई नियामकीय (regulatory) हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.

उसने कहा कि कोई व्यापक Regulatory Framework की सिफारिश करने के लिए यह उपयुक्त समय नहीं है. ट्राई के इस बयान से दूरसंचार कंपनियों को झटका लगा है, जो OTT संचार सेवा प्रदाताओं के लिए समान नियम की लंबे समय से वकालत करते आ रहे हैं.

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने ओटीटी संचार सेवाओं के लिए नियामकीय व्यवस्था के मामले में अपना विचार रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीजें और स्पष्ट होने खासकर आईटीयू (अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ) के अध्ययन के बाद मामले पर गौर किया जा सकता है. आईटीयू इस ओटीटी सेवाओं को लेकर व्यापक अध्ययन कर रहा है.

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ट्राई के इस रुख से ओटीटी सेवा प्रदाताओं को राहत मिली है. दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों के संगठन सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI , सीओएआई) ने कहा कि उसे उम्मीद थी कि ट्राई उनकी मांगों पर गौर करेगा और जो बाजार विसंगतियां लंबे समय से चली आ रही हैं, उसे दूर करेगा.

सीओएआई ने कहा कि इन मुद्दों के समाधान के बिना दूरंसचार सेवा प्रदाता ओटी सेवा देने वाली कंपनियों के मुकाबले नुकसान की स्थिति में रहेंगे. ओटीटी सेवा प्रदाता दूरसंचार कंपनियों की तरह कड़े नियामकीय/लाइसेंस व्यवस्था के दयरे में नहीं आते. ओटीटी सेवाओं में वे अनुप्रयोग और सेवाएं आती हैं, जिनका उपयोग इंटरनेट के जरिये किया जाता है और इसके लिए परिचालक के नेटवर्क का उपयोग होता है. स्काइप, वाइबर, व्हाट्सऐप और हाइक कुछ लोकप्रिय और व्यापक स्तर पर उपयोग होने वाली ओटीटी सेवाएं हैं.

ट्राई ने यह भी कहा कि ओटीटी सेवाओं से जुड़े निजता और सुरक्षा मुद्दों को लेकर नियामकीय हस्तक्षेप की फिलहाल जरूरत नहीं है. नियामक ने एक बयान में कहा, कानून और नियमों के दायरे से फिलहाल बाहर ओटीटी (ओवर द टॉप) की सेवाओं से संबद्ध विभिन्न पहलुओं के लिए व्यापक नियामकीय व्यवस्था सिफारिश करने के लिए यह उपयुक्त समय नहीं है.

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ट्राई ने नवंबर 2018 में इस प्रकार की सेवाओं के लिए परिचर्चा पत्र जारी किया था. इस परिचर्चा पत्र के जरिये उसने विभिन्न मुद्दों पर उद्योग से अपने विचार देने को कहा था. नियामक ने कहा है कि बिना कोई नियामकीय हस्तक्षेप के बाजार की शक्तियों (मांग एवं आपूर्ति) को स्थिति का जवाब देने के लिये काम करने की अनुमति दी जा सकती है. ट्राई ने कहा, हालांकि गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर उपयुक्त समय पर हस्तक्षेप किया जाएगा.

देश में दूरसंचार कंपनियां लंबे समय से मांग कर रही हैं कि ओटीटी इकाइयों को नियामकीय व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाए क्योंकि वे समान प्रकार की सेवाएं दे रही हैं जबकि उन पर लाइसेंस और शुल्क (जैसे लाइसेंस फी) जैसी कोई बाध्यताएं नहीं हैं. हालांकि ओटीटी सेवा प्रदाताओं का कहना है कि उनको नियामकीय व्यवस्था के अंतर्गत लाये जाने से नवप्रवर्तन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा.

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