CORONA से निपटने के लिए IISc, IIT ने विकसित किये Mobile App

Author : Rajeev Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 09 Apr 2020 5:39 PM

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IISc and IITs develop mobile apps to track coronavirus infections नयी दिल्ली : दुनियाभर में कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं, कई जगहों पर इसके लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है.

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IISc and IITs develop mobile apps to track coronavirus infections : नयी दिल्ली : दुनियाभर में कोरोना वायरस से निपटने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं, कई जगहों पर इसके लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है.

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भारत में कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में सहायता के लिए आईआईएससी, बेंगलुरु और चार आईआईटी ने ‘गो कोरोना गो’ से लेकर ‘संपर्क-ओ-मीटर’ तक कई मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किये हैं. आईआईएससी की एक टीम ने ‘गो कोरोना गो’ ऐप विकसित किया है, जो कोविड-19 के संदिग्धों के संपर्क में आये लोगों की पहचान करने में मदद कर सकता है.

आईआईएससी के एक संकाय सदस्य तरुण रंभा ने बताया, ऐप ब्लूटूथ और जीपीएस का इस्तेमाल करके कोविड-19 से संक्रमितों या संदिग्धों के संपर्क में आये लोगों की पहचान करने में मदद करेगा. यह दूर के संपर्कों से भी जोखिम की प्रवृत्ति को समझने के लिए अस्थायी नेटवर्क एनालिटिक्स का उपयोग करता है. इसके साथ ही यह ऐप बीमारी के प्रसार का आकलन करने और उन लोगों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जिनके वायरस की चपेट में आने की आशंका है.

आईआईटी रोपड़ के एक बीटेक छात्र ने ‘संपर्क-ओ-मीटर’ नामक एक मोबाइल ऐप विकसित किया है, जो मानचित्र के जरिये कोरोना वायरस के अधिकतम संक्रमण की आशंका वाले वाले क्षेत्रों को इंगित कर सकता है. इस ऐप को विकसित करने वाले छात्र साहिल वर्मा ने कहा, ऐप विभिन्न कारकों पर विचार करने के बाद एक ‘जोखिम स्कोर’ उत्पन्न करता है और लोगों को एहतियाती उपाय करने के लिए सचेत कर सकता है, जिसमें खुद को पृथकवास में रखना या किसी डॉक्टर से संपर्क करना भी शामिल है. यह ऐप उपयोगकर्ताओं को कोरोना संपर्क जोखिम रेटिंग का अनुमान लगाने की सुविधा प्रदान करेगा.

इसी तरह, आईआईटी बंबई के छात्रों और पूर्व छात्रों की एक टीम ने ‘कोरोनटाइन’ नामक एक मोबाइल ऐप बनाया है जो कोरोना वायरस के लक्षण वाले या वायरस के संपर्क में आये संदिग्ध लोगों को ट्रैक करने में मदद करेगा. अगर कोई व्यक्ति अपने पृथकवास से बाहर निकलता है तो ऐसे में इस ऐप के जरिये उस व्यक्ति का पता लगाया जा सकता है.

आईआईटी दिल्ली में छात्रों ने भी कोविड-19 के पीड़ितों के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों का पता लगाने में मदद करने के लिए एक ऐप बनाया है. संस्थान के डिजाइन विभाग में पीएचडी के छात्र अरशद नासर ने कहा, ब्लूटूथ का उपयोग करके एप्लिकेशन उन सभी व्यक्तियों को ट्रैक और अलर्ट करेगा, जो पिछले दिनों में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के संपर्क में आया हो, या उसके आसपास से गुजरा हो. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की तारीख और क्षेत्र का भी ऐप के जरिये पता चल जाएगा.

आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर कमल जैन ने एक ट्रैकिंग ऐप विकसित किया है जो कोरोना वायरस को रोकने के लिए आवश्यक निगरानी प्रणाली को मजबूत कर सकता है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश में गुरुवार को कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 166 हो गई और संक्रमितों की कुल संख्या 5,734 हो गई है. मंत्रालय ने बताया कि अब भी 5,095 लोग संक्रमित हैं जबकि 472 लोग स्वस्थ हो चुके हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है तथा एक व्यक्ति देश छोड़कर चला गया है.

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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