LMV ड्राइविंग लाइसेंस पर मालगाड़ी चलाने से कट जाता चालान तो जान लें ये नियम, बच जाएंगे पैसे

13 सितंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने हल्के मोटर वाहन के संबंध में ड्राइविंग लाइसेंस रखने वाले लोगों द्वारा मालवाहक वाहन चलाने संबंधी याचिका पर सरकार से विचार करने का निर्देश दिया और कहा कि उसे लोगों की आजीविका पर भी विचार करना चाहिए.
नई दिल्ली : क्या आपके पास एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) लाइसेंस है और आप हल्के परिवहन और माल वाहक वाहन चलाते हैं? ऐसा करने पर ट्रैफिक पुलिस आपका चालान काटने के साथ व्यावसायिक लाइसेंस बनाने की हिदायत देती है? ऐसे में आपकी परेशानी बढ़ जाती होगी. इस बीच, एक बड़ा सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या जिन लोगों के पास एलएमवी लाइसेंस है, क्या वे हल्के मालवाहक वाहन चला सकते हैं या नहीं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों को भी जानना होगा, जो 13 सितंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया है. इससे पहले संविधान पीठ ने 18 जुलाई, 2023 को मुकुंद देवांगन बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के मामले में एक फैसला सुनाया था, जिसमें एलएमवी लाइसेंस पर मालवाहक वाहन चलाने को लेकर अहम बातें कही गई हैं. वाहन चालकों को सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भी जानना बेहद जरूरी है. आइए, जानते हैं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा और सरकार को क्या आदेश दिए.
आजीविका का ख्याल रखे सरकार
पिछले 13 सितंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने हल्के मोटर वाहन के संबंध में ड्राइविंग लाइसेंस रखने वाले लोगों द्वारा मालवाहक वाहन चलाने संबंधी याचिका पर सरकार से विचार करने का निर्देश दिया और कहा कि उसे लोगों की आजीविका पर भी विचार करना चाहिए. सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि पूरे देश में लाखों ऐसे लोग हो सकते हैं, जो मुकुंद देवांगन बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मामले में दिए गए फैसले के आधार पर काम कर रहे हैं. यह कोई संवैधानिक मसला नहीं है. यह पूरी तरह से वैधानिक है. इसलिए सरकार को इस पर विचार करना चाहिए.
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सड़क सुरक्षा को कानून के सामाजिक उद्देश्य से करना होगा संतुलित
भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सरकार से कहा कि सड़क सुरक्षा को कानून के सामाजिक उद्देश्य से संतुलित करना चाहिए. आपको यह देखना होगा कि क्या यह गंभीर चुनौतियों का कारण बन सकता है. हम सामाजिक नीति के मामलों को एक साथ तय नहीं कर सकते.
क्या है मुकुंद देवांगन मामले पर कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट की तीन जज के सदस्यों वाली संविधान पीठ ने मुकुंद देवांगन बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एक मामले में 18 जुलाई, 2023 को फैसला सुनाया था. इस फैसले में संविधान पीठ की ओर से कहा गया था कि करीब 7,500 किलोग्राम से कम वजन वाले मालवाहक परिवहन वाहन को चलाने के लिए एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस से अलग कोई अन्य लाइसेंस बनाने की जरूरत नहीं है. अगर किसी व्यक्ति के पास एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस है, तो हल्का मालवाहक वाहन चला सकता है. हालांकि, इसका वजन 7,500 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए. हालांकि, मालवाहक वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने को लेकर सरकार का नियम कुछ और ही कहता है. सरकार के नियमों के अनुसार, मालवाहक परिवहन वाहन चलाने के लिए किसी भी व्यक्ति के पास हैवी ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है.
भारत में पहले बनता है लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस
आपको यह भी बता दें कि एलएमवी या हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनने से पहले भारत में लर्निंग लाइसेंस बनाया जाता है. यह लाइसेंस कैसे बनाया जाता है, नीचे दिए गए जानकारी के आधार पर आप आवेदन कर सकते हैं.
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सबसे पहले आप परिवहन सारथी पोर्टल पर जाएं और राज्य चुनें.
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‘न्यू लर्नर लाइसेंस ‘ पर क्लिक करें, जिसके बाद नया पेज खुल जाएगा.
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यहां अपने बारे में निजी जानकारी, अपना पता, फोन नंबर आदि भरना पड़ेगा.
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फिर फोटो और साइन की स्कैन्ड कॉपी अपलोड करनी होगी.
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इसके बाद टेस्ट के लिए तारीख चुनें.
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आखिरी स्टेप है फीस जमा करनी होगी.
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यहां तक ऑनलाइन प्रक्रिया के बाद आपको टेस्ट के लिए आरटीओ जाना पड़ेगा.
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इसके कुछ दिन बाद लर्निंग लाइसेंस ऑनलाइन आप वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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