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बराकर नदी व अजय नदी में लगाये गये वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम

Updated at : 11 Jul 2024 9:34 PM (IST)
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बराकर नदी व अजय नदी में लगाये गये वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम

पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल की तरफ से सुरक्षित एवं संरक्षित रेल परिचालन के लिए आधुनिक तकनीकी का सहारा लिया जा रहा है. बरसात के मौसम में महत्वपूर्ण रेल पुलों पर नदियों के जलस्तर की निगरानी के लिए रेल पुलों पर वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाये गये हैं. इस सिस्टम से जलस्तर की जानकारी ऑटोमेटेड एसएमएस के माध्यम से संबंधित अधिकारी को प्राप्त होती है.

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आसनसोल.

पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल की तरफ से सुरक्षित एवं संरक्षित रेल परिचालन के लिए आधुनिक तकनीकी का सहारा लिया जा रहा है. बरसात के मौसम में महत्वपूर्ण रेल पुलों पर नदियों के जलस्तर की निगरानी के लिए रेल पुलों पर वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाये गये हैं. इस सिस्टम से जलस्तर की जानकारी ऑटोमेटेड एसएमएस के माध्यम से संबंधित अधिकारी को प्राप्त होती है.

आसनसोल रेल मंडल के सीनियर डीइएन कोऑर्डिनेटर राजीव रंजन ने बताया कि आसनसोल रेल मंडल अंतर्गत दो हाई लेवल की रेल पुल पहले ब्रिज बराकर नदी का ब्रिज जिनका नंबर 18 रखा गया है इस ब्रिज पर वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है. दूसरी ओर सूरी शातिया लाइन के साइड जो अजय नदी रिवर साइड है उस नदी में भी वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया. उस ब्रिज का नंबर 42 है. उन्होंने कहा कि रेल बोर्ड के निर्देश के अनुसार बरसात के समय में इन सभी ब्रिजों की सेफ्टी को लेकर गहन जांच की जाती है. श्री रंजन ने यह भी बताया कि बराकर नदी में अभी पानी का स्तर 28.25 मीटर से नीचे है. दूसरी ओर सूरी शातिया अजय रिवर का पानी का स्तर 9.93 मीटर से नीचे है. पानी का स्तर जब इन पुलों पर इससे ऊपर हो जाता है तो उसे खतरे की स्थिति मानी जाती है. इससे ब्रिज की मजबूती पर असर पड़ता है. उस लाइन पर यदि 130 किलोमीटर प्रति घंटे की ट्रेन की जो स्पीड होती है उसे कम कर दिया जाता है.

अपनाये जाते हैं अन्य उपाय

पानी का स्तर बढ़ने पर ट्रेनों की गति को कम करने के अलावा वहां आठ घंटे के लिए एक स्टाफ को तैनात कर दिया जाता है. पुलों पर वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाये गये हैं. आधुनिक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम के लग जाने से नदियों पर बने रेल पुलों पर वाटर लेवल की सूचना मिलनी आसान हो गयी है. इस सिस्टम में सोलर पैनल से जुड़ा एक सेंसर है, जिसमें एक चिप भी लगी है. यह सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा है. प्रतिदिन नियमित अंतराल पर नदियों के जलस्तर की जानकारी संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से मिल जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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