ePaper

सुंदरवन : जान जोखिम में डाल कर फिर शहद एकत्रित करने निकले 430 मौली

Updated at : 30 Mar 2024 12:32 AM (IST)
विज्ञापन
सुंदरवन : जान जोखिम में डाल कर फिर शहद एकत्रित करने निकले 430 मौली

दक्षिण 24 परगना के सुंदरवन क्षेत्र में मछली व केकड़ा पकड़ने के अलावा शहद इकट्ठा करना प्रमुख व्यवसाय है. प्रतिवर्ष शहद एकत्रित करने वाले मौली प्रजाति के सैकड़ों

विज्ञापन

-जी-20 समिट में विदेशी मेहमानों को सुंदरवन का शहद भेंट में देने व जीआइ टैग मिलने से बढ़ी मांग नम्रता पांडेय, सुंदरवन दक्षिण 24 परगना के सुंदरवन क्षेत्र में मछली व केकड़ा पकड़ने के अलावा शहद इकट्ठा करना प्रमुख व्यवसाय है. प्रतिवर्ष शहद एकत्रित करने वाले मौली प्रजाति के सैकड़ों लोग यह जोखिम भरा कार्य करने को अपने घरों से निकलते हैं. वन विभाग ने जगह-जगह पर वनकर्मियों को तैनात किया है, ताकि शहद इकट्ठा करनेवालों को कोई परेशानी न हो. शहद इकट्ठा करने में दक्षिण 24 परगना वन विभाग व सुंदरवन टाइगर प्रोजेक्ट संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं. सुंदरवन टाइगर रिजर्व द्वारा शहद इकट्ठा करने का कार्य पांच अप्रैल से शुरू होगा. वहीं, बुधवार को मौली प्रजाति के सैकड़ों लोग जंगलों से शहद इकट्ठा करने के लिए रवाना हो गये. इस साल लगभग 150 नावों को शहद इकट्ठा करने की अनुमति दी गयी है. मौलियों के 91 समूहों को अनुमति दे दी है, जिसमें कुल 430 सदस्य हैं. सभी वनदेवी की पूजा कर यात्रा पर निकल चुके हैं. उन्हें विशेष मास्क, सैनिटाइजर, ग्लव्स आदि मुहैया कराये गये हैं. उनके नाम से दो लाख रुपये का बीमा भी कराया गया है. शहद की सरकारी कीमत भी बढ़ा दी गयी है. दक्षिण 24 परगना वन विभाग के डीएफओ मिलन मंडल ने बताया कि पिछले वर्ष ए ग्रेड शहद की कीमत 265 रुपये थी, जिसे इस वर्ष 300 रुपये किलोग्राम कर दिया गया है. बी ग्रेड शहद की कीमत अब 265 रुपये है. वन विभाग क्षेत्र में इस वर्ष 10 मीट्रिक टन शहद उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. पिछले वर्ष 17 मैट्रिक टन शहद इकट्ठा किया गया था. सुंदरवन के शहद को जीआइ टैग मिलने के बाद मौली पहली बार शहद एकत्रित करने जा रहे हैं. एक महीने तक शहद एकत्रित करने का काम चलेगा. बाघ के साथ मधुमक्खियों का हमला भी झेलते हैं मौली शहद एकत्रित करने के दौरान इन ग्रामीणों को सबसे ज्यादा खतरा बाघ से रहता है. कारण शुद्ध शहद की तलाश में इन्हें सुंदरवन के घने जंगलों में जाना पड़ता है, जहां बाघ रहते हैं. अगर बाघ के हमले से ये बच भी जायें, तो उन्हें मधुमक्खियों के हमले का डर होता है. हालांकि एक बार में ही मधुमक्खी का पूरा छत्ता खाली नहीं हो जाता है. छत्ते से शहद एकत्रित करने के लिए मौलियों को कई चरणों में काम करना पड़ता है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola