बुलडोजर एक्शन : अवैध निर्माण को गिराने से दो सप्ताह पहले देना होगा नोटिस, कोलकाता नगर निगम को सरकार का निर्देश
कलकत्ता नगर निगम
Bulldozer Action: अवैध निर्माण को गिराने के संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा की गयी टिप्पणी के बाद प्रशासनिक हलकों में एक नयी तत्परता देखने को मिली है.
मुख्य बातें
कोलकाता से शिव कुमार की रिपोर्ट
Bulldozer Action: कोलकाता नगर निगम किसी भी अवैध निर्माण को गिराने से पहले एक औपचारिक आवेदन के आधार पर दो सप्ताह तक का अतिरिक्त समय देगा. इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा दिशा निर्देश जारी किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अवैध निर्माणों के खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई करने से पहले संबंधित परिवारों और निवासियों को पर्याप्त समय दिया जाये. निगम का यह निर्णय उन्हीं निर्देशों के अनुरूप है.
कोर्ट की टिप्पणी के बाद प्रशासन सक्रिय
बता दे कि हाल ही में तिलजला क्षेत्र में एक अवैध निर्माण को गिराने के संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा की गयी टिप्पणी के बाद प्रशासनिक हलकों में एक नयी तत्परता देखने को मिली है. बताया गया है कि शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अलीपुर के बोरो 9 क्षेत्र के अधिकारियों के साथ एक बैठक की. इस बैठक के तुरंत बाद ही इस निर्णय की घोषणा की गयी.
लोगों ने कोर्ट में समय दिये जाने की रखी मांग
नगर आयुक्त स्मिता पांडे के अनुसार, अवैध निर्माण को गिराया जाने से पहले सुनवाई में शामिल होने के लिए लोग अतिरिक्त समय दिये जाने का अनुरोध करते हैं, तो उन्हें वह समय दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि भले ही कोई इमारत अवैध हो, उसके निवासियों को उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किये बिना यूं ही बेदखल नहीं किया जा सकता. उन्हें उनकी आवश्यकताओं के अनुसार समय आवंटित किया जायेगा, जिसमें दो सप्ताह तक का विस्तार अनुमेय होगा.
निगम की ओर से आये नोटिस पर लोगों की आपत्ति
निगम सूत्रों के अनुसार, पहले तिलजला-तपसिया क्षेत्र में अवैध निर्माणों के संबंध में गिराने के नोटिस जारी किये थे, जिससे स्थापित नियमों के अनुसार कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गयी थी. इन अवैध निर्माणों में रहने वाले निवासियों को तुरंत अपने घर खाली करने का निर्देश दिया गया था. एक ऐसा निर्देश, जिसने उन्हें एक कठिन दुविधा में डाल दिया था.
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अदालत ने नाटिस पर लगायी रोक
आरोप है कि परिसर खाली करने के लिए जारी किये गये नोटिसों में बहुत कम समय दिया गया था, जिसके बाद निगम ने गिराने का काम शुरू कर दिया था. परिणामस्वरूप, निवासियों ने राहत के लिए अदालत का रुख किया. इस बीच, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उक्त अवैध निर्माण को गिराने के नोटिसों पर रोक लगा दी है.
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