स्टाम्प पेपर मामले में हरकत में आया जिला प्रशासन

Updated at :23 Mar 2017 8:27 AM
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स्टाम्प पेपर मामले में हरकत में आया जिला प्रशासन

सिलीगुड़ी. बुधवार को प्रभात खबर में प्रकाशित खबर के आधार पर जिला प्रशासन ने स्टाम्प पेपर की कालाबाजारी करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. नॉन जूडिशियल स्टाम्प पेपर बेचनेवाले सभी वेंडरो पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, जांच कमिटी गठित कर धांधली करनेवाले वेंडरों का लाइसेंस रद्द […]

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सिलीगुड़ी. बुधवार को प्रभात खबर में प्रकाशित खबर के आधार पर जिला प्रशासन ने स्टाम्प पेपर की कालाबाजारी करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है. नॉन जूडिशियल स्टाम्प पेपर बेचनेवाले सभी वेंडरो पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, जांच कमिटी गठित कर धांधली करनेवाले वेंडरों का लाइसेंस रद्द करने का निर्देश ट्रेजरी अधिकारी को दिया गया है.

बुधवार को प्रभात खबर में नॉन जूडिशियल स्टाम्प पेपर का खुले आम गोरखधंधा चलने की खबर छपी थी. खबर देखते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और स्टाम्प पेपर की कालाबाजारी करनेवाले तथा बैक डेट से स्टाम्प पेपर बेचनेवाले वेंडरों को गिरफ्त में लेने के लिए निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया. प्रशासन की इस सख्ती से गैरकानूनी रूप से स्टाम्प पेपर बेचनेवाले वेंडरों में हड़कंप है.

बैक डेट से स्टाम्प पेपर बिक्री की शिकायत मिलने पर प्रभात खबर प्रतिनिधि ने इसकी पुष्टि के लिए स्वयं स्टाम्प पेपर खरीदा था. सिलीगुड़ी अदालत परिसर का एक वेंडर 50 रुपये का स्टाम्प पेपर 250 रुपये के एवज में बैक डेट से देने को राजी हो गया. स्टाम्प पेपर खरीदने के बाद अन्य ग्राहकों से पता लगा कि 10 और 20 रुपये के स्टाम्प पेपर के लिये सौ रुपये से अधिक लिये जा रहे हैं. थोड़ी छानबीन करने पर पता लगा कि बीस रुपये के स्टाम्प पेपर की सप्लाई कुछ कम है. लेकिन दस रुपये के स्टाम्प पेपर की सप्लाई सामान्य है. लेकिन कालाबाजारी से मोटी कमाई के लिए वेंडर दस रुपये के स्टाम्प पेपर को भी आउट ऑफ स्टॉक बताते हैं. फिर अधिक रुपये लेकर मुहैया कराते हैं.

इस संबंध में पश्चिम बंगाल लॉ क्लर्क एसोसिएशन की सिलीगुड़ी यूनिट के महासचिव मृत्युंजय सरकार ने बताया कि वर्तमान में सिलीगुड़ी में स्टाम्प पेपर बेचने वाले कुल 13 वेंडर हैं. जिसमें से करीब 8 वेंडरों ने हाल ही में लाइसेंस प्राप्त किया है. लेकिन ये सभी वेंडर अदालत में नहीं बैठते हैं. कुछ वेंडर अपने घर से स्टाम्प पेपर बेचने का काम करते हैं. लॉ क्लर्क एसोसिएशन की ओर कई बार आंदोलन कर वेंडरो को सतर्क किया गया. बार-बार जिला प्रशासन को बताने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने बताया कि कई वेंडर ऐसे हैं, जिनके नाम पर लाइसेंस तो है, लेकिन वे किसी अन्य के मार्फत स्टाम्प पेपर बेचते हैं. इसकी वजह से धांधली और भी बढ़ गयी है.

नॉन जूडिशियल स्टाम्प पेपर बिक्री की निगरानी ट्रेजरी अधिकारी करते हैं. इसकी कालाबाजारी और धांधली के संबंध में सिलीगुड़ी ट्रेजरीअधिकारी सरजित विश्वास ने बताया कि खबर देखते ही सिलीगुड़ी महकमा अधिकारी ने वेंडरों पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है. स्टॉम्प पेपर की कालाबाजारी और बैक डेट से बिक्री करना कानूनन अपराध है. कोई भी वेंडर ऐसा नहीं कर सकता. श्री विश्वास ने बताया कि पहले भी वेंडरों के खिलाफ इस तरह के आरोप लगे हैं. डिस्ट्रिक्ट जज के नेतृत्व में एक जांच कमिटी गठित कर मामले की जांच करायी जायेगी. दोषी पाये जानेवाले वेंडरो का लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा.

सिलीगुड़ी महकमा शासक हरिशंकर पणिक्कर ने बताया कि सभी स्टाम्प पेपर वेंडरों के लाइसेंस का नवीकरण किया गया है या नहीं, इसकी जांच करने का निर्देश दिया गया है. इसके अतिरिक्त वेंडर समय-समय पर रजिस्टर अपडेट कर रहे हैं या नहीं, इसकी जांच करने का भी निर्देश दिया गया है. स्टाम्प पेपर की कालाबाजारी और बैक डेट से बिक्री करना कानूनन जुर्म है. कोइ भी लाइसेंस होल्डर वेंडर यह काम नहीं कर सकता. मजिस्ट्रेट समय-समय पर जांच करेंगे और दोषी पाये जाने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा.
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