अचानक हुई बारिश आम पैदावार के लिए अच्छी

Updated at :22 Mar 2017 8:11 AM
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अचानक हुई बारिश आम पैदावार के लिए अच्छी

मालदा. अचानक बदले इस मौसम को बागवानी विभाग आम की पैदावार के लिए अच्छा बता रहा है. सोमवार शाम से ही मालदा में गरज के साथ बारिश और तेज हवा चलने लगी. देर रात में मूसलाधार बारिश भी हुई. बागवानी विभाग का कहना है कि इससे आम के टिकोले का डंठल मजबूत होगा. विभाग के […]

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मालदा. अचानक बदले इस मौसम को बागवानी विभाग आम की पैदावार के लिए अच्छा बता रहा है. सोमवार शाम से ही मालदा में गरज के साथ बारिश और तेज हवा चलने लगी. देर रात में मूसलाधार बारिश भी हुई. बागवानी विभाग का कहना है कि इससे आम के टिकोले का डंठल मजबूत होगा.

विभाग के जिला उपनिदेशक राहुल चक्रवर्ती ने बताया कि सोमवार रात बारिश के बाद मंगलवार को तेज धूप निकली है. इससे आम के पेड़ों की शाखाओं व पत्तियों पर पानी रुका नहीं रहेगा. इसका लाभ यह होगा कि इससे रोग पैदा करने वाले कीड़ों के आक्रमण की आशंका कम होगी. अचानक हुई यह बारिश आम की पैदावार के लिए बहुत अच्छी है. आम के पेड़ों में अभी मटर के दाने बराबर फल लगे हैं. इनका डंठल मजबूत हो जायेगा जिससे टिकोलों के झड़ने की आशंका कम होगी. हालांकि बारिश और बदली के बीच अगर ओलावृष्टि होती है तो आम को नुकसान हो सकता है.

इस साल मालदा जिले में बीते सालों के मुकाबले आम में मंजर ज्यादा आये हैं और फल भी ज्यादा लगे हैं. बागवानी विभाग इसे 30 सालों का नया रिकार्ड बता रहा है. इस बीच, आम उत्पादकों ने मंजर और फल के बोझ से डालों को झुकने से बचाने के लिए बांस लगाकर उन्हें सहारा देने का काम शुरू कर दिया है.

इंगलिशबाजार ब्लॉक के जहुरातला इलाके के आम किसानों दिवाकर मंडल, साबेह शेख, सुजीत मंडल आदि ने बताया कि इस साल पेड़ों में कल्पना से परे आम आये हैं. मंजर में मटर दाना बराबर आम लगना शुरू हो चुका है. सोमवार रात जबरदस्त आंधी-पानी आया. पहले तो हमलोग आंधी-पानी देखकर निराश हो उठे, लेकिन मंगलवार की सुबह से जिस तरह कड़ी धूप निकली है उससे अब नुकसान की आशंका नहीं है, बल्कि यह अच्छा ही हुआ. जिन लोगों ने पेड़ों पर अभी तक पानी का छिड़काव नहीं किया था, उन्हें अब यह करने की जरूरत नहीं होगी.

बागवानी विभाग ने बताया कि अगर किसी आम बागान में रोग दिखायी देता है, तो आवश्यकता के हिसाब से दवा का प्रयोग करना उचित होगा. आम में टिकोले लगने के बाद हर 15-20 दिन पर सिंचाई करनी होगी. कीड़ों के आक्रमण पर नजर रखनी होगी और संबंधित विभाग की सलाह के अनुसार पेड़ों पर दवा का उपयोग करना होगा.
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