शुरू में फ्लॉप शो साबित हुआ धान खरीद अभियान

Updated at :21 Mar 2017 8:54 AM
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शुरू में फ्लॉप शो साबित हुआ धान खरीद  अभियान

बालूरघाट. राज्य सरकार द्वारा सीधे किसानों से सरकारी दर पर धान खरीदने का मामला दक्षिण दिनाजपुर जिले में फ्लॉप शो साबित हो रहा है. नियम-कानून कड़े होने की वजह से किसान सरकार को धान नहीं बेच रहे हैं. यही वजह है कि राज्य सरकार द्वारा धान खरीद का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है. […]

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बालूरघाट. राज्य सरकार द्वारा सीधे किसानों से सरकारी दर पर धान खरीदने का मामला दक्षिण दिनाजपुर जिले में फ्लॉप शो साबित हो रहा है. नियम-कानून कड़े होने की वजह से किसान सरकार को धान नहीं बेच रहे हैं. यही वजह है कि राज्य सरकार द्वारा धान खरीद का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा है.

बाध्य होकर जिला प्रशासन ने धान खरीद के नियमों में ढील दी है. पहले धान खरीदने के लिए किसानों को जमीन के कागजात आदि दिखाने पड़ते थे. अब यह बाध्यता खत्म कर दी गई है. किसानों का यह भी आरोप है कि जमीन के कागजात दिखाने की बाध्यता से न तो राज्य सरकार और न ही किसानों को कोई लाभ हुआ. इसका फायदा बिचौलिये उठा ले गये. स्थानीय किसानों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार जिले में ऐसे काफी किसान हैं जिनकी अपनी ज्यादा जमीन नहीं है. बटाईदार के दौर पर काफी किसान खेती करते हैं. जिनके पास अपनी जमीन है भी तो कागजात दुरुस्त नहीं है.

दूसरी तरफ बिचौलिये इसी बात का फायदा उठा रहे थे. वह किसानों से कम दाम पर धान खरीद रहे थे. जिला प्रशासन को इसका अंदाजा लग गया. उसके बाद ही धान खरीद के नियमों में ढील दी गई है. जिला प्रशासन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस साल दक्षिण दिनाजपुर जिले में एक लाख 97 हजार मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है. जिले के आठ ब्लॉकों में इसके लिए 13 धान खरीद केन्द्र बनाये गये हैं. सरकार 1470 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है. एक अनुमान के मुताबिक जिले में किसानों की संख्या करीब 10 लाख है. इनमें से चार लाख किसानों ने धान बेचने के लिए सरकारी खाते में अपना नाम लिखवाया है. फरवरी के पहले सप्ताह तक धान खरीदने का 10 प्रतिशत लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका था. इससे जिला प्रशासन में खलबली मच गई. 10 फरवरी को राज्य के परिवहन सचिव अलापन बनर्जी जिले के दौरे पर आये थे. उन्होंने धान खरीद में तेजी लाने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक भी की. वह तब से लेकर अब तक तीन बार जिले का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने अधिकारियों को साफ तौर पर कह दिया है कि किसी भी कीमत पर धान खरीद का लक्ष्य पूरा करना होगा. उसके बाद से ही जिला प्रशासन के आला अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है. किसानों के बीच जहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है, वहीं नियम-कानूनों में भी ढील दी गई है. किसान मंडी तक सहज रूप से धान लेकर आ सकें, इसके लिए और भी कई नये केन्द्र बनाये गये. अभी कुल 72 स्थानों पर धान खरीद का काम हो रहा है. इसके साथ ही 43 सोसायटी तथा 4 महिला स्वनिर्भर समूह का गठन किया गया है.

इन समूहों के सदस्य घर-घर जाकर किसानों को सरकारी दर पर धान बेचने के लिए समझा रहे हैं. उसके बाद से धान खरीद केन्द्रों में किसानों की भीड़ थोड़ी बढ़ी है. जिला प्रशासन सूत्रों का कहना है कि अब किसान भारी संख्या में धान बेचने के लिए सरकारी केन्द्रों में आ रहे हैं. इस संबंध में जिला अधिकारी संजय बोस का कहना है कि जमीन के कागजात दिखाने की बाध्यता खत्म किये जाने के बाद किसान धान बेचने के लिए सरकारी मंडियों की ओर आ रहे हैं.


दूसरी तरफ किसानों ने जिला प्रशासन पर भी निशाना साधा है. कई किसानों ने सरकारी धान खरीद केन्द्रों पर किसानों से धान नहीं खरीदने का आरोप लगाया है. किसानों का कहना है कि सरकारी मंडी में जाने से वहां के अधिकारी तरह-तरह के दस्तावेज मांगते हैं. इसके अलावा कई बार मंडियों से लौटा दिया जाता है. इसी वजह से वह लोग सरकार को धान बेचने के लिए उत्सुक नहीं थे. अब नियम कानूनों में थोड़ी ढील दी गई है तो वह सभी सरकारी केन्द्रों पर जाकर धान बेच रहे हैं.
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