केएसओ ने सड़क पर उतर कर आंदोलन करने की दी धमकी, कामतापुरी भाषा को लेकर जारी विवाद गहराया

Updated at :17 Mar 2017 8:16 AM
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केएसओ ने सड़क पर उतर कर आंदोलन करने की दी धमकी, कामतापुरी भाषा को लेकर जारी विवाद गहराया

सिलीगुड़ी. कामतापुरी भाषा को मान्यता देने की पहल राज्य सरकार ने शुरू कर दी है. हांलाकि इसको लेकर विवाद भी शुरू हो गया है. कामतापुर प्रोग्रेसिव पार्टी(केपीपी) समर्थित छात्र संगठन कामतापुर स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन(केएसओ) ने बांग्ला व बांग्ला भाषा बचाओ कमिटी पर बाधा डालने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही केएसओ ने यह भी कहा […]

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सिलीगुड़ी. कामतापुरी भाषा को मान्यता देने की पहल राज्य सरकार ने शुरू कर दी है. हांलाकि इसको लेकर विवाद भी शुरू हो गया है. कामतापुर प्रोग्रेसिव पार्टी(केपीपी) समर्थित छात्र संगठन कामतापुर स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन(केएसओ) ने बांग्ला व बांग्ला भाषा बचाओ कमिटी पर बाधा डालने का आरोप लगाया है.

इसके साथ ही केएसओ ने यह भी कहा है कि यदि कामतापुरी भाषा को मान्यता देने राह में कोइ बाधा देने की कोशिश करेगा तो सड़क पर उतर कर उसका सामना करेंगे. केएसओ के जिला अध्यक्ष चंदन सिंह व केपीपी के सचिव संजय सरकार ने साफ-साफ कहा है कि बांग्ला व बांग्ला भाषा बचाओ कमेटी के ऐसे किसी भी प्रयास की वहलोग निंदा भी करते हैं. दोनों सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में संवाददाताओं से बात कर रहे थे.

उल्लेखनीय है कि 21 फरवरी को अंतराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में केपीपी की ओर से एक रैली की गयी थी. उसी दिन राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कामतापुरी भाषा मान्यता देने के लिए कमेटी बनाने की घोषणा की. मुख्यमंत्री के इस ऐलान से इन लोगों का उत्साह काफी बढ़ा हुआ है. बाद में बांग्ला व बांग्ला भाषा बचाओ कमिटी के एक सदस्य ने यह बयान दिया कि कामतापुरी भाषा बांग्ला का ही एक रूप है. कामपुरी भाषा की कोई लिपि नहीं है.

उन्होंने इस भाषा को स्वीकृत देने का घोर विरोध भी किया. गुरूवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में पत्रकारों को संबोधित करते हुए केएसओ के अध्यक्ष चंदन सिंह ने बांग्ला व बांग्ला भाषा बचाओ कमिटी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि राज्य का नाम बंगाल है, यहां की मातृभाषा बांगाली है. स्वाभाविक रूप से इस भाषा को स्वीकृति मिल चुकी है. फलस्वरूप बंगाल और बांग्ला भाषा को बचाने का कोई औचित्य ही नहीं है. जो लोग कामतापुरी भाषा को मान्यता देने का विरोध कर रहे हैं, उन्हें भाषा और लिपि का ज्ञान नहीं है. वामपंथी विचार के कुछ लोग अपना चोला बदल कर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं.

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