जलपाईगुड़ी के सभी होमों पर प्रशासन की कड़ी नजर
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :06 Mar 2017 9:25 AM
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जलपाईगुड़ी : शिशु तस्करी मामले में चंदना चक्रवर्ती के दो होम और एक डेवलपमेंट सेंटर बंद कराये जाने के बाद जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन ने जिले के दूसरे होमों की निगरानी बढ़ा दी है. जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिले में गोद देने के लिए एकमात्र स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी चंदन चक्रवर्ती के पास थी. लेकिन उनके होम के […]
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जलपाईगुड़ी : शिशु तस्करी मामले में चंदना चक्रवर्ती के दो होम और एक डेवलपमेंट सेंटर बंद कराये जाने के बाद जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन ने जिले के दूसरे होमों की निगरानी बढ़ा दी है. जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिले में गोद देने के लिए एकमात्र स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी चंदन चक्रवर्ती के पास थी. लेकिन उनके होम के बंद हो जाने के बाद अब शिशुओं को ऑफलाइन तरीके से गोद लेने के लिए जिला समाज कल्याण विभाग से संपर्क करने को कहा गया है. जिले में बिना सरकारी मंजूरी के कुछ होमों के चलने की खबर मिलने के बाद जिला शिशु सुरक्षा यूनिट ने गोपनीय जांच शुरू कर दी है.
जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत चंदन चक्रवर्ती विमला शिशु गृह और बालिग महिलाओं के लिए एक आश्रय होम का संचालन कर रही थीं. शिशु तस्करी का आरोप लगने के बाद प्रशासन ने ये दोनों होम बंद करा दिये हैं. जिले में जेजे कानून के तहत तीन और होम हैं. इनमें पांडापाड़ा का निजलय, रेसकोर्स पाड़ा का सरकारी कोरक होम और क्लब रोड का अनुभव होम शामिल है. निजलय के ऊपरी तल पर इसी संस्था का एक और होम है, जहां 18 साल से अधिक की महिलाओं के रहने की व्यवस्था है.जुवेनाइल जस्टिस कानून के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त होम में 50 आवासिक रखने का निर्देश है. सरकारी कोरक होम में 50 की जगह 100 किशोरों को रखने का प्रस्ताव कई बार कोलकाता भेजा गया है. लेकिन मंजूरी नहीं मिली है. दूसरी तरफ सरकार से मंजूरी प्राप्त गैर सरकारी होमों में आवासिकों की संख्या बढ़ायी जा रही है.
सबसे आश्चर्य की बात है कि जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिलों में महीने में औसतन 75 बच्चे बरामद किये जा रहे हैं. इसके अलावा महिलाओं और युवतियों को भी बरामद किया जा रहा है. इन दोनों जिलों के शहरों, गांवों, रेलवे स्टेशनों, चाय बागानों आदि से आये दिन बच्चे बरामद किये जाते हैं. सरकारी सूत्रों ने चिंता जताते हुए बताया कि जुवेनाइल जस्टिस के तहत चलने वाले होमों में बच्चों को रखने के लिए जगह का अभाव हो गया है. शिशुओं को बरामद तो कर लिया जाता है, लेकिन उनके पुनर्वास को लेकर समस्या दिखायी देती है. पुनर्वास के लिए सभी होमों में पर्याप्त बुनियादी ढांचा भी नहीं है.
उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर और कूचबिहार में तीन स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन होम हैं. लेकिन इनमें भी नये शिशुओं को रखने के लिए बहुत कम जगह बची है. ऐसे में आये दिन बरामद होने वाले शिशुओं का पुनर्वास एक बड़ी समस्या बन गयी है. इस बीच, चालसा और सिलीगुड़ी से लगे जलपाईगुड़ी जिले के इलाके में दो होमों को सरकारी मंजूरी नहीं होने के चलते जिला प्रशासन पहले ही बंद करा चुका है.
सूत्रों से खबर मिली है कि अब भी दो-तीन होम बिना अनुमोदन के संचालित हो रहे हैं. एक-दो दिन के अंदर ही प्रशासन इन होमों के खिलाफ अभियान चलायेगा. जलपाईगुड़ी के प्रभारी जिला समाज कल्याण अधिकारी पीयूष साहा ने बताया कि जिले का एकमात्र स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन होम फिलहाल बंद कर दिया गया है. ऐसे में अगर कोई ऑनलाइन प्रक्रिया के अलावा शिशु गोद लेना चाहता है, तो उसे उनके कार्यालय से संपर्क करना होगा.
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि सभी हलकों में यह सूचना दे दी गयी है कि शिशुओं की बरामदगी और उनके पुनर्वासन को लेकर सीडब्ल्यूसी की जगह उनके कार्यालय से संपर्क किया जाये. बहुत जल्द जिले में सभी होमों का मौके पर जाकर मुआयना किया जायेगा. होम में रहने वालों के रहने-खाने, मनोरंजन, चिकित्सा, देखभाल आदि का स्तर जांचा जायेगा. साथ ही लाइसेंस के नवीकरण, आर्थिक फंड आदि के बारे में भी जानकारी दी जायेगी. कोई कमी पाये जाने पर जरूरी कदम उठाया जायेगा.
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