चाय बागान से साढ़े पांच लाख रुपये वसूलना हुआ दूभर

Updated at :03 Mar 2017 8:18 AM
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चाय बागान से साढ़े पांच लाख रुपये वसूलना हुआ दूभर

सिलीगुड़ी: जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में स्थित बामनडागा चाय बागान से बकाया साढ़े पांच लाख रुपये वसूल पाना एक कारोबारी को काफी भारी पड़ रहा है. सिलीगुड़ी के महेश कुमार नामक एक व्यवसायी पैसेफिक ऑयल डॉट कॉम नाम से डुवार्स में एक पेट्रोल पंप चलाते हैं. उन्होंने बामनडागा चाय बागान के गाड़ियों तथा फैक्टरी को […]

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सिलीगुड़ी: जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में स्थित बामनडागा चाय बागान से बकाया साढ़े पांच लाख रुपये वसूल पाना एक कारोबारी को काफी भारी पड़ रहा है. सिलीगुड़ी के महेश कुमार नामक एक व्यवसायी पैसेफिक ऑयल डॉट कॉम नाम से डुवार्स में एक पेट्रोल पंप चलाते हैं. उन्होंने बामनडागा चाय बागान के गाड़ियों तथा फैक्टरी को डीजल की आपूर्ति की थी.

यह घटना 2005 की है और उन्हें चाय बागान से इस बाबत कुल साढ़े पांच लाख रुपये वसूलना है. तब से लेकर करीब 12 लाख का समय हो चुका है, श्री कुमार चाय बागान से अपने पैसे नहीं वसूल पाये हैं. आलम यह है कि यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट तक पहुंचा और मुकदमा जीतने के बाद भी उन्हें पैसे नहीं मिले. सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए श्री कुमार ने कहा कि बामनडागा चाय बागान टोंडू टी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के अधीन है और कंपनी ने साढ़े पांच लाख रुपये का चेक उन्हें दिया था. बैंक में जमा करने पर वह चेक बाउंस हो गया. उसके बाद से लेकर वह कई बार चाय बागान प्रबंधन से बकाया वैसे देने की मांग करते रहे, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ. आखिरकार उन्होंने वर्ष 2009 में बामनडागा टी स्टेट के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में मामला कर दिया.

कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से उनके पक्ष में फैसला हुआ और चाय बागान प्रबंधन को पैसे भुगतान करने के लिए कहा गया. उसके बाद भी बागान प्रबंधन ने उनके पैसे का भुगतान नहीं किया है. उसके बाद फिर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और हाईकोर्ट ने चाय बागान की कुछ जमीन और संपत्ति नीलाम कर पैसे दिलाने की पहल शुरू की. इसके लिए हाईकोर्ट ने चंदन गांगुली के नेतृत्व में तीन नीलामकर्ताओं की एक कमेटी बनायी. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त नीलामकर्ताओं को भी चाय बागान में प्रवेश नहीं करने दिया गया. श्री कुमार ने कहा कि वह तथा हाईकोर्ट के नियुक्त तीनों नीलामकर्ता 17 फरवरी को चाय बागान जा रहे थे.

चाय बागान के श्रमिकों को उनके खिलाफ भड़काया गया. बागान प्रबंधन ने चाय श्रमिकों को यह कहकर बरगलाया कि चाय बागान बंद करने की साजिश की जा रही है. इससे चाय श्रमिक भी काफी गुस्से में आ गये. श्री कुमार ने आगे कहा कि वह लोग 17 फरवरी को जब नीलामकर्ता के साथ चाय बागान जा रहे थे तब इसकी सूचना नागराकाटा थाने को भी दी गई थी.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी दिखाने के बाद भी नागराकाटा पुलिस ने कोई मदद नहीं की. जिसकी वजह से वह और नीलामकर्ता चाय बागान नहीं जा सके. चाय बागान से करीब एक किलोमीटर दूर ही टाना-टानीपुर के निकट सैकड़ों चाय श्रमिक जमा हो गये और उनकी गाड़ी को रोक कर विरोध प्रदर्शन करने लगे. बाध्य होकर वह लोग वापस लौट आये. इस मामले की शिकायत हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त नीलामकर्ता चंदन गांगुली द्वारा नागराकाटा थाने में भी दर्ज करायी गई है. उन्होंने आगे कहा कि अब चाय बागान प्रबंधन द्वारा मामला वापस लेने के लिए धमकियां दी जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर वह एक बार फिर से हाईकोर्ट में गुहार लगायेंगे.

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