सिलीगुड़ी में भी सामने आया नर्सिंग होम का अमानवीय चेहरा

Updated at :01 Mar 2017 8:17 AM
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सिलीगुड़ी में भी सामने आया नर्सिंग होम का अमानवीय चेहरा

सिलीगुड़ी. विभिन्न गैर सरकारी अस्पतालों एवं नर्सिंग होमों द्वारा मरीजों से अत्यधिक बिल लेने तथा गैर जरूरी टेस्ट आदि करा कर बिल बढ़ाने को लेकर इन दिनों पूरे राज्य में खलबली मची हुई है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी नर्सिंग होम द्वारा लगातार की जा रही धांधली से परेशान हैं. उन्होंने पिछले दिनों कोलकाता […]

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सिलीगुड़ी. विभिन्न गैर सरकारी अस्पतालों एवं नर्सिंग होमों द्वारा मरीजों से अत्यधिक बिल लेने तथा गैर जरूरी टेस्ट आदि करा कर बिल बढ़ाने को लेकर इन दिनों पूरे राज्य में खलबली मची हुई है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी नर्सिंग होम द्वारा लगातार की जा रही धांधली से परेशान हैं. उन्होंने पिछले दिनों कोलकाता में तमाम बड़े निजी अस्पतालों तथा नर्सिंग होमों के अधिकारियों को लेकर एक बैठक की थी और नर्सिंग होम को रोगियों के प्रति मानवीय रूख अपनाने के लिए कहा था.

उन्होंने न केवल अत्यधिक बिल लेने को लेकर नर्सिंग होमों को चेतावनी दी, बल्कि प्रशासन को भी शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने की खुल छूट दी है. ऐसे माहौल में अब सिलीगुड़ी में भी एक नर्सिंग होम का अमानवीय चेहरा सामने आया है. सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के अधीन भक्तिनगर थाना अंतर्गत एनजेपी स्थित घोष नर्सिंग होम पर गलत नाम से डेथ सर्टिफिकेट जारी करने और अब उसमें सुधार के लिए एक लाख रुपये मांगने का आरोप लगा है. यह आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने भी अपनी ओर से जांच शुरू कर दी है. मामला सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर सीएस लेप्चा तक पहुंच गया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 35 के अधीन भक्तिनगर के रहने वाले विश्वजीत गांगुली ने अपने पिता सत्यनारायण गांगुली को गंभीर रूप से बीमार स्थिति में 22-1-2016 को घोष नर्सिंग होम में भरती कराया था. दो दिन तक इलाज चलने के बाद उनकी मौत हो गई.


आरोप है कि अस्पताल ने उनकी मौत के बाद जो डेथ सर्टिफिकेट जारी किया है, उसमें गलती है. विश्वजीत गांगुली का कहना है कि उनके पिता के डेथ सर्टिफिकेट में गांगुली की स्पेलिंग गलत है एवं उनके मृतक पिता सत्यनारायण गांगुली के पिता के नाम को भी गलत लिखा गया है. विश्वजीत गांगुली ने कहा कि डेथ सर्टिफिकेट गलत होने की वजह से परिवार वालों को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. इंश्योरेंस क्लेम आदि लेने में परेशानी हो रही है. वह पिछले एक साल से कई बार नर्सिंग होम का चक्कर काट चुके हैं, लेकिन डॉक्टरों ने डेथ सर्टिफिकेट में सुधार नहीं की है. पुलिस कमिश्नर को दी गई शिकायत में विश्वजीत गांगुली ने कहा है कि वह काफी गरीब हैं और ट्रेन में सामान बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है. उसने ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया कि घोष नर्सिंग होम में उसके पिता दो दिन ही भरती रहे और उनकी मौत भी हो गई. उसके बाद भी नर्सिंग होम ने उनसे 30 हजार रुपये लिये. जैसे ही उनके पिता के डेथ सर्टिफिकेट में गलती की बात सामने आयी, वह नर्सिंग होम गया और इसमें सुधार की मांग की. लेकिन नर्सिंग होम प्रबंधन ने उनकी बातों पर गौर नहीं किया. तब से लेकर अब तक कई बार नर्सिंग होम में चक्कर काटने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ है. एक लाख रुपये देना उसके बस की बात नहीं है. विश्वजीत गांगुली ने अपने ज्ञापन में पिता के डेथ सर्टिफिकेट में सुधार के लिए पुलिस से तत्काल कदम उठाने की मांग की है.
नर्सिग होमों ने आरोपों को खारिज किया:

इस बीच, घोष नर्सिंग होम ने विश्वजीत गांगुली के आरोपों को खारिज कर दिया है. घोष नर्सिंग होम के मालिक विश्वजीत गांगुली से बातचीत की गई, तो उन्होंने आरोपों को निराधार बताया.उन्होंने कहा कि उससे एक लाख रुपये की कोई मांग नहीं की गई है. वह नर्सिंग होम का 25 हजार रुपये का बिल ही नहीं दे सका, तो भला एक लाख रुपये कहां से देगा.

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