26 को दार्जिलिंग में जनसभा का आयोजन, चिटफंड पीड़ितों का आंदोलन पहुंचा पहाड़

Updated at :25 Feb 2017 8:22 AM
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26 को दार्जिलिंग में जनसभा का आयोजन, चिटफंड पीड़ितों का आंदोलन पहुंचा पहाड़

सिलीगुड़ी. पिछले कुछ वर्षों में आम निवेशकों तथा एजेंटों के करोड़ों रुपये डकार कर भाग जाने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ आंदोलन जारी है. उत्तर बंगाल में अब तक विभिन्न स्थानों पर फरार चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा एजेंटों के पैसे वापस करने की मांग को लेकर सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में […]

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सिलीगुड़ी. पिछले कुछ वर्षों में आम निवेशकों तथा एजेंटों के करोड़ों रुपये डकार कर भाग जाने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ आंदोलन जारी है. उत्तर बंगाल में अब तक विभिन्न स्थानों पर फरार चिटफंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा एजेंटों के पैसे वापस करने की मांग को लेकर सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल में विभिन्न स्थानों पर आंदोलन जारी है.

अब यह आंदोलन दार्जिलिंग में भी होगा. यह घोषणा चिटफंड सफरर्स ऐंड एजेंट यूनिटी फोरम ऑफ नार्थ बंगाल के अध्यक्ष पार्थो मैत्र ने की है. वह सिलीगुड़ी में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने आगे कहा कि दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के करीब तीन लाख निवेशक चिटफंड कंपनियों के शिकार हुए हैं. करीब लोगों का पैसा कंपनी डकार गई है. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में चिटफंड कंपनियों के खिलाफ अब तक कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ है. इसी वजह से अब दार्जिलिंग में भी आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है.

उन्होंने आगे कहा कि 26 फरवरी को दार्जिलिंग के चौक बाजार में चिटफंड कंपनियों से पीड़ित लोगों को लेकर एक जनसभा का आयोजन किया गया है. इस जनसभा में रायगंज के सांसद मोहम्मद सलीम तथा प्रख्यात वकील विकास भट्टाचार्य भी शामिल होंगे. श्री भट्टाचार्य ने भी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दर्ज किया है और उन्हीं के पहल पर इस मामले की जांच की जा रही है. श्री मैत्र ने आगे कहा कि राज्य तथा केन्द्र सरकार दोनों में से कोई भी पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के पक्ष में नहीं हैं. सिर्फ जांच की बात कही जा रही है. निवेशकों के पैसे लौटाने को लेकर कोई बात नहीं हो रही है.


उन्होंने आगे कहा कि जांच अपनी जगह सही है. चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए, लेकिन इससे निवेशकों को क्या लाभ हो रहा है. निवेशक तो अपना सबकुछ गंवा चुके हैं. चिटफंड कंपनियों के एजेंटों की भी यही स्थिति है. कई एजेंट तो निवेशकों के डर से आत्महत्या कर चुके हैं. कई घर-वार छोड़कर बाहर रहने को मजबूर हैं. सबसे पहली जरूरत निवेशकों एवं एजेंटों का पैसा तत्काल वापस करने की है. उन्होंने आगे कहा कि जिन कंपनियों ने अपना कारोबार शुरू किया उसके अधिकारियों ने कई सरकारी दस्तावेज दिखाये. इन सरकारी दस्तावेजों को देखकर ही लोगों ने निवेश किया था. उन सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए जिन्होंने चिटफंड कंपनियों को दस्तावेज जारी किये. उन्होंने आगे कहा कि वह लोग ऐसे सरकारी अधिकारियों को भी घेरेंगे. आने वाले दिनों में ऐसे सरकारी अधिकारियों का घेराव कर निवेशकों का पैसा लौटाने की मांग करेंगे.
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