अब कांग्रेस ने भी की सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग, लगातार होगा आंदोलन

Updated at :19 Feb 2017 9:38 AM
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अब कांग्रेस ने भी की सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग, लगातार होगा आंदोलन

सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग से अलग कर कालिम्पोंग को जिला बनाये जाने के बाद सिलीगुड़ी को भी जिला बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. एक ओर जहां गैर राजनीतिक संगठन वृहतर सिलीगुड़ी नागरिक मंच द्वारा इस मांग को लेकर आंदोलन जारी है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोरचा […]

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सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग से अलग कर कालिम्पोंग को जिला बनाये जाने के बाद सिलीगुड़ी को भी जिला बनाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. एक ओर जहां गैर राजनीतिक संगठन वृहतर सिलीगुड़ी नागरिक मंच द्वारा इस मांग को लेकर आंदोलन जारी है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोरचा खोल दिया है.

भाजपा पहले ही सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग कर चुकी है. अब कांग्रेस ने भी सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग की है. सिर्फ इतना ही नहीं, इस मांग को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर आंदोलन का भी ऐलान किया है. आज हिलकार्ट रोड स्थित कांग्रेस कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए पार्टी के जिला अध्यक्ष तथा माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी के विधायक शंकर मालाकार ने सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि कालिम्पोंग के मुकाबले सिलीगुड़ी की जनसंख्या और ढांचागत सुविधाएं काफी अधिक है. उसके बाद भी सिलीगुड़ी की उपेक्षा की जा रही है. पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अलीपुरद्वार को जिला बनाया. उसके बाद कालिम्पोंग जैसे छोटे शहर को भी जिला बना दिया गया. उन्हें लग रहा था कि मुख्यमंत्री कालिम्पोंग के साथ ही सिलीगुड़ी को जिला बनायेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. दरअसल, राज्य की तृणमूल सरकार द्वारा सिलीगुड़ी की अपेक्षा की जा रही है.

यहां के लोगों को विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए दार्जिलिंग जाना पड़ता है. इससे समय और पैसे दोनों की बरबादी होती है. सिलीगुड़ी की आबादी करीब 15 लाख होने के बाद भी इसको जिला न बनाना अपने आप में काफी आश्चर्यजनक है. उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग में पार्टी ने बड़े पैमाने पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है. पहले चरण में सिलीगुड़ी महकमा के विभिन्न ब्लॉकों में आंदोलन के साथ ही राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी को ज्ञापन दिया जायेगा. इस महीने की 27 या 28 तारीख को राज्यपाल द्वारा समय देते ही उन्हें ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया है.

श्री मालाकार ने यह भी कहा कि अपनी इस मांग को लेकर कांग्रेस मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात करेंगी. मुख्यमंत्री कार्यालय से मुलाकात का समय मांगा गया है. एक बार समय मिलते ही कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री से मिलेंगे और सिलीगुड़ी को अलग से जिला बनाने की मांग करेंगे. उसके बाद भी यदि राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन की धार को और तेज किया जायेगा. एक मई के बाद सिलीगुड़ी में बंद बुलाने की भी योजना कांग्रेस की है. श्री मालाकार ने कहा कि वह लोग अलग जिले से कम कुछ भी मानने को तैयार नहीं हैं. यही वजह है कि एक मई के बाद दार्जिलिंग के जिला अधिकारी का बहिष्कार किया जायेगा. वह लोग जिला अधिकारी से मिलने अथवा किसी भी प्रकार की बातचीत करने के लिए दार्जिलिंग नहीं जायेंगे. जिला अधिकारी को सिलीगुड़ी आकर बैठना होगा. उन्होंने आगे बताया कि सिलीगुड़ी महकमा के अधीन विभिन्न ब्लॉकों में भी कांग्रेसकर्मी आंदोलन करेंगे. धरना-प्रदर्शन के साथ ही जिला बनाने की मांग को लेकर सामूहिक हस्ताक्षर के साथ ज्ञापन सौंपा जायेगा.

उत्तरकन्या का औचित्य क्या: श्री मालाकार ने राज्य के तृणमूल सरकार पर सिलीगुड़ी की पूरी तरह से उपेक्षा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल के विकास के लिए राज्य मिनी सचिवालय उत्तरकन्या की स्थापना सिलीगुड़ी में की. अब उत्तरकन्या में तृणमूल कांग्रेस के मंत्री आते ही नहीं हैं. ऐसे में इस मिनी सचिवालय का औचित्य क्या रह जाता है. उन्होंने कहा कि पहले जब सिलीगुड़ी के निकट डाबग्राम-फूलबाड़ी के विधायक गौतम देव जब उत्तर बंगाल विकास मंत्री थे तब वह उत्तरकन्या में बैठते थे. वर्तमान में उत्तर बंगाल विकास मंत्री रवीन्द्रनाथ घोष हैं. वह कूचबिहार जिले के नाटाबाड़ी के विधायक हैं. पिछले सात महीनों के दौरान वह मात्र एक बार उत्तरकन्या आये हैं. इससे जाहिर है कि राज्य मिनी सचिवालय की उपेक्षा तृणमूल कांग्रेस के मंत्री कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) का चेयरमैन भी अलीपुरद्वार के विधायक को बनाया गया है. वह भी सिलीगुड़ी कम ही आते हैं. इन तमाम बातों से जाहिर है कि राज्य की तृणमूल सरकार तथा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सिलीगुड़ी की उपेक्षा कर रही हैं.
भाजपा को न्योता नहीं : श्री मालाकार ने आगे कहा कि सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग को लेकर वह एक सर्वदलीय बैठक भी करना चाहते हैं. भाजपा को छोड़कर तमाम राजनीतिक दलों को इस बैठक में शामिल होने का न्योता दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि वह इस मांग को लेकर राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ भी विचार-विमर्श करना चाहते हैं. हालांकि उन्होंने सर्वदलीय बैठक में भाजपा को बुलाने से साफ इंकार कर दिया.
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