कम ठंड पड़ने से लीची उत्पादन होगा आधा

Updated at :13 Feb 2017 9:27 AM
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कम ठंड पड़ने से लीची उत्पादन होगा आधा

मालदा. इस साल जाड़े की मौसम की मनमानी के कारण जिले में लीची का उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है. इस बार पर्याप्त जाड़ा नहीं पड़ने के कारण ज्यादातर लीची बागानों में पेड़ों में कोंपलें देखने को नहीं मिल रही है. जिला बागवानी विभाग ने आशंका जतायी है कि पिछली साल की तुलना में इस […]

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मालदा. इस साल जाड़े की मौसम की मनमानी के कारण जिले में लीची का उत्पादन प्रभावित होने का अनुमान है. इस बार पर्याप्त जाड़ा नहीं पड़ने के कारण ज्यादातर लीची बागानों में पेड़ों में कोंपलें देखने को नहीं मिल रही है. जिला बागवानी विभाग ने आशंका जतायी है कि पिछली साल की तुलना में इस बार मालदा जिले में लीची का उत्पादन आधा हो सकता है. इसके लिए सिर्फ मौसम जिम्मेदार है या अन्य कोई कारण भी है, इस बारे में बागवानी विभाग विश्लेषण कर रहा है. हालांकि दूसरी तरफ बागवानी विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिले में इस बार आम का रिकार्ड उत्पादन हो सकता है.बागवानी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, मालदा जिले में 1250 हेक्टेयर जमीन पर लीची की खेती होती है.
जिले के कालियाचक-1, 2 और 3 ब्लॉक में लीची का ज्यादातर उत्पादन होता है. इसके अलावा कुछ उत्पादन इंगलिश बाजार और मानिकचक ब्लॉक इलाके में भी होता है. बीते साल जिले में 16 हजार मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हुआ था. लेकिन इस बार इसका आधा उत्पादन ही होने की आशंका है.बागवानी विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि लीची के पेड़ों में फरवरी महीने में 70 से 80 फीसद तक कोंपलें फूट आती हैं, लेकिन इस बार जिले में कम जाड़ा पड़ा, इसलिए कोंपलें निकलने में समय लग रहा है. आम के लिए तो ऐसा मौसम अनुकूल है, लेकिन लीची के लिए यह नुकसान करने वाला है. फरवरी महीने के अंदर यदि अधिकतर पेड़ों में कोंपलें नहीं फूटीं, तो बाद में लीची के फल लगने में समस्या होगी. इससे फलों में रोग और कीड़े लगने की आशंका बढ़ जायेगी.कालियाचक-1 ब्लॉक के अलीपुर गांव के निवासी सैकत शेख, आजम अली, दिलवर शेख आदि ने बताया कि उनके इलाके में बड़े पैमाने पर लीची की खेती होती है. हर साल मालदा से लीची राज्य के अन्य हिस्सों और दूसरे राज्यों में भेजी जाती है. इस बार पेड़ों में कोंपलें नहीं आ रही हैं. इसे देखते हुए हमें चिंता हो रही है कि इस बार ठीक से फल नहीं लगेंगे. लीची किसान भी इसके लिए मौसम की मनमानी को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
बागवानी विभाग के उप-निदेशक राहुल चक्रवर्ती ने बताया कि लीची में फल लगने से पहले ठीक से जाड़ा होना बहुत जरूरी है. लेकिन इस बार कनकनी वाली सर्दी नहीं हुई और अब तो ठंड कम होना शुरू हो गई है. लेकिन अभी तक पेड़ों में कोंपलें नहीं फूटी हैं. उनके विभाग का अनुमान है कि इस बार लीची उत्पादन आठ हजार मीट्रिक टन पर ही सिमट सकता है.
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