मालदा में दो महीने से बंद है जीकेसीआइइटी
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :07 Feb 2017 9:31 AM
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800 विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में सभी ने जमकर किया विरोध प्रदर्शन दुर्गापुर में प्रबंधन को दी गयी जानकारी तत्काल कारगर कदम उठाने की मांग मालदा. प्रख्यात कांग्रेस नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री गनी खान चौधरीके नाम पर बने गनी खान चौधरी इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी (जीकेसीआइइटी) पिछले दो महीने से बंद है. इसकी […]
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800 विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में
सभी ने जमकर किया विरोध प्रदर्शन
दुर्गापुर में प्रबंधन को दी गयी जानकारी
तत्काल कारगर कदम उठाने की मांग
मालदा. प्रख्यात कांग्रेस नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री गनी खान चौधरीके नाम पर बने गनी खान चौधरी इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी (जीकेसीआइइटी) पिछले दो महीने से बंद है. इसकी वजह से करीब आठ सौ विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लट गया है.
अब इन लोगों ने मालदा के दोनों कांग्रेसी सांसद के साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष तथा विधायक दिलीप घोष से मदद की गुहार लगायी . यहां पढ़ रहे विद्यार्थियों ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी जानकारी दी . उसके बाद भी कॉलेज के नहीं खुलने से सभी विद्यार्थी काफी परेशान हैं. सोमवार को इन विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया और मैनेजमेंट को इसकी पूरी जानकारी दी. इन लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षोँ के दौरान केन्द्र सरकार की ओर से इस विश्वविद्यालय पर करीब तीन सौ करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं. उसके बाद भी यहां से पास करने वाले विद्यार्थियों को अब तक प्रमाण-पत्र तक नहीं मिला है. इस बीच, वर्ष 2017-18 शैक्षिक सत्र में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले भी इसके बंद हो जाने से विद्यार्थियों में आतंक है.
वर्तमान में इस युनिवर्सिटी को चलाने की जिम्मेदारी दुर्गापुर के नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की है.विद्यार्थियों ने यथाशीघ्र विश्वविद्यालय के नहीं खोले जाने की स्थिति में आमरण अनशन की भी धमकी दी है. दूसरी ओर नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक अशोक कुमार दे ने विश्वविद्यालय के बंद होने के लिए विद्यार्थियों को ही जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि कुछ विद्यार्थियों द्वारा लगातार हंगामा एवं दुर्व्यवहार किये जाने की वजह से ही इस प्रकार की परिस्थिति बनी है. स्थिति स्वाभाविक नहीं होने तक विश्वविद्यालय को खोलना संभव नहीं है. विद्यार्थियों का आरोप है कि बगैर कोई कारण बताये पिछले वर्ष 7 दिसंबर को अचानक एक बयान जारी कर प्रबंधन ने विश्वविद्यालय को बंद कर दिया. यहां कर्मचारी तथा फैकल्टी को मिलाकर कुल 80 लोग हैं. विद्यार्थियों की संख्या भी आठ सौ है. विद्यार्थियों का कहना है कि सभी फैकल्टी तथा कर्मचारी घर बैठे ही तनख्वाह के रूप में मोटी रकम ले रहे हैं. अगस्त महीने में बीटेक के 80 विद्यार्थी पहले बैच में पास हुए हैं.
अब तक किसी को भी प्रमाण-पत्र नहीं मिला है. विद्यार्थियों का कहना है कि पिछले साल नवंबर में भी यहां विद्यार्थियों की परीक्षाएं हुई थी. फरवरी महीना होने के बाद भी अब तक कॉपी की जांच नहीं हुई है. जाहिर है कि परीक्षा परिणाम में भी देरी होगी. इसके साथ ही सर्टिफिकेट डिप्लोमा कोर्स तथा बीटेक प्रथम वर्ष में विद्यार्थियों की नामांकन भी शुरू नहीं की गई है. इन तमाम परिस्थितियों से यहां पढ़ रहे विद्यार्थियों में आतंक है. इन लोगों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर ही झूठा आरोप लगाने की बात कही है. विद्यार्थियों ने कहा कि सभी आंदोलन स्थानीय प्रशासन की जानकारी में है. प्रशासन को जानकारी देकर ही वह लोग आंदोलन करते हैं.
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