नगदी संकट खत्म होते ही कैशलेस सिस्टम की निकली हवा

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Jan 2017 8:19 AM

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सिलीगुड़ी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते साल आठ नवंबर को नोटबंदी के एलान के बाद कैशलेस इंडिया गढ़ने की मुहिम छेड़ी थी. लेकिन सिलीगुड़ी में अढ़ाइ महीने के भीतर ही कैशलेस लेनदेन टांय-टांय फिस होने लगा है. डिजिटल लेन-देन लोग बंद करने लगे हैं. लोग पेटीएम, स्वाइप मशीन, डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने से कतराने […]

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सिलीगुड़ी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते साल आठ नवंबर को नोटबंदी के एलान के बाद कैशलेस इंडिया गढ़ने की मुहिम छेड़ी थी. लेकिन सिलीगुड़ी में अढ़ाइ महीने के भीतर ही कैशलेस लेनदेन टांय-टांय फिस होने लगा है. डिजिटल लेन-देन लोग बंद करने लगे हैं.
लोग पेटीएम, स्वाइप मशीन, डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करने से कतराने लगे हैं. नोटबंदी के 50 दिन के अंदर पूरे देश के साथ-साथ सिलीगुड़ी के लोगों ने भी कैशलेस लेन-देन स्वीकार कर लिया था. खुदरा विक्रेता हो या फिर थोक विक्रेता सभी ने लेन-देन के लिए पेटीएम, स्वाइप मशीन के अलावा अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल शुरू कर दिया था. नगदी की मारी-मारी की वजह से खरीदार भी कैशलेस लेन-देन स्वीकार कर चुके थे. लेकिन जब से बाजार में नगदी का संकट खत्म हुआहै तब से कैशलेस सिस्टम की हवा भी निकलने लगी है.

धीरे-धीरे लोग वापस कैश लेन-देन को ही तवज्जो देने लगे हैं. लोगों का कहना है कि जब नगद रूपये की समस्या दूर हो गयी है तो बेवजह डिजिटल लेन-देन कर जोखिम क्यों उठाना. विधान मार्केट के एक सब्जी विक्रेता संतोष साहनी का कहना है कि नोटबंदी के दौरान नगद रूपये के अभाव की वजह से उन्होंने भी अपने यहां पेटीएम की सुविधा शुरु कर दी थी और इसके जरिये खरीदारों ने लेन-देन भी शुरु कर दिया था. इसके अलावा संतोष ने स्वाइप मशीन लगाने का भी मन बना लिया था. लेकिन जैसे ही लोगों के पास नगद रूपये की किल्लत दूर हो गयी. उन्होंने स्वाइप मशीन खरीदने की तो दूर की बात अब पेटीएम का भी इस्तेमाल बंद कर दिया है. एक कपड़ा दुकानदार दीपक अग्रवाल का कहना है कि डिजिटल लेन-देन कई बार लोगों के सामने बड़ी समस्या भी खड़ी कर देता है. डिजिटल लेन-देन के दौरान अगर जरा भी चूक हुई तो किसी अन्य के एकाउंट में रूपये जमा हो जाता है. इसके अलावा यदि हैकरों का अटैक हुआ है तो खरीदार और दुकानदार दोनों के एकाउंट से रूपये गायब हो जाते हैं. ऐसे अधिकांश मामलों में रूपये पीड़ित व्यक्ति को वापस मिलते ही नहीं. अगर मिलते भी हैं तो कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

केंद्र संचालित डाकघरों में ही नहीं है कैशलेस सुविधा
गैर-सरकारी दुकान-प्रतिष्ठानों की तो दूर की बात केंद्र सरकार द्वारा संचालित डाकघरों में ही कैशलेश लेन-देन की कोई सुविधा नहीं है. ऐसी बात नहीं है कि उपभोक्ता डेबिट कार्ड, एटीएम या फिर अन्य डिजिटल सुविधाओं से डाकघरों में लेन-देन करना नहीं चाहते. उपभोक्ता अपने एकाउंट में रूपये जमा, फिक्सड डिपोजिट करने या फिर किसान विकास पत्र, राष्टीय बचत पत्र या अन्य प्रोडेक्ट खरीदने के लिए एटीएम, डेबिट कार्ड व अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कैशलेस लेन-देन के लिए करना चाहते हैं. लेकिन डाकघरों में कैशलेस लेन-देन के लिए डिजिटल सुविधाएं न होने की वजह से उपभोक्ताओं को मायूस होना पड़ रहा है और मजबूरन आज भी घंटों कतार में खड़े होना पड़ रहा है. डाकघरों की यह अवस्था केवल छोटे कस्बों या गांवों की ही नहीं बल्कि सिलीगुड़ी शहर के भी समस्त डाकघरों में है.

प्रधाननगर शाखा हो या विधानरोड, हिलकार्ट रोड शाखा या फिर सिलीगुड़ी के कचहरी रोड स्थित मुख्य डाकघर . सभी की बानगी एक ही जैसी है. इस बाबत उत्तर बंगाल-सिक्किम क्षेत्र के पोस्ट मास्टर जनरल (पीएमजी) ललितेंदु प्रधान को कोई जानकारी ही नहीं है. उनके मोबाइल फोन पर संपर्क करने पर उन्हें कैशलेस लेन-देन को लेकर के उपभोक्तों की शिकायतों की जानकारी दी और उनसे डाकघरों में डीजिटल सुविधा न होने का सवाल किया गया तो उन्होंने साफ-साफ कह दिया कि उन्हें इस बाबत कोई जानकारी नहीं है.

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