कृष्णेंदु-निहार युद्ध में खरगोश व गिनीपिग बने मोहरे

Updated at :20 Jan 2017 7:16 AM
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कृष्णेंदु-निहार युद्ध में खरगोश व गिनीपिग बने मोहरे

मालदा: कृष्णेंदु चौधरी के पद से हटने के बाद शहर के शुभंकर शिशु उद्यान पार्क के व्यवस्थापकों के साथ इंगलिशबाजार नगरपालिका के नये चेयरमैन निहार घोष का शीतयुद्ध शुरू हो गया है. पार्क के भीतर खरगोश, गिनीपिग पालने को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है. अभी शुभंकर शिशु उद्यान की जिम्मेदारी पूर्व चेयरमैन कृष्णेंदु चौधरी […]

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मालदा: कृष्णेंदु चौधरी के पद से हटने के बाद शहर के शुभंकर शिशु उद्यान पार्क के व्यवस्थापकों के साथ इंगलिशबाजार नगरपालिका के नये चेयरमैन निहार घोष का शीतयुद्ध शुरू हो गया है. पार्क के भीतर खरगोश, गिनीपिग पालने को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है. अभी शुभंकर शिशु उद्यान की जिम्मेदारी पूर्व चेयरमैन कृष्णेंदु चौधरी के बड़े भाई शुभेंदु चौधरी के पास है. 1996 में इस पार्क को देखभाल के लिए नगरपालिका बोर्ड ने कांट्रैक्टर एसोसिएशन को सौंप दिया था. उस समय बोर्ड के चेयरमैन कृष्णेंदु चौधरी थे.

वहीं कांट्रैक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष निहार घोष थे. बाद में निहार घोष को संगठन से हटाकर उनकी जगह कृष्णेंदु चौधरी के बड़े भाई शुभेंदु चौधरी काबिज हो गये. तब से इस पार्क की देखभाल की जिम्मेदारी में शुभेंदु चौधरी हैं. चार गुणा दो पुट के एक पिंजड़े में पांच खरगोश और 12 गिनीपिग हैं.

गत 10 जनवरी को इंगलिशबाजार ब्लॉक की बीडीओ देवश्री मुखर्जी ने नगरपालिका के चेयरमैन को एक चिट्ठी भेजी, जिसमें कहा गया है कि पार्क में खरगोश और गिनीपिग को अस्वास्थ्यकर स्थिति में पाला जा रहा है. इन असहाय जीवों को जिस अवस्था में रखा गया है, वह बहुत दुखदायी है. बीडीओ ने इस बारे में महकमा अधिकारी संदीप नाग को भी चिट्ठी भिजवायी है. चिट्ठी मिलने के बाद महकमा अधिकारी ने इंगलिशबाजार नगरपालिका को चिट्ठी भेजकर इस मामले में कदम उठाने को कहा है.
इधर प्रशासन की चिट्ठी मिलते ही नगरपालिका हरकत में आ गयी. उस समय कृष्णेंदु चौधरी चेयरमैन पद से हट चुके थे और उनकी जगह प्रभारी चेयरमैन का काम बाबला सरकार संभाल रहे थे. खरगोश और गिनीपिग पाले जाने से अनजान नगरपालिका प्रशासन ने प्रतिनिधि भेजकर इस मामले में खोज-खबर लेना शुरू किया. इस बीच मालदा कलेक्टरेट के कुछ डिप्टी मजिस्ट्रेट शुभंकर शिशु उद्यान गये और यह देखा कि खरगोश और गिनीपिग किस स्थिति में हैं. पार्क में जाने पर प्रशासनिक अधिकारियों को पता चला कि एक खरगोश बीमार है. यह बात अधिकारियों ने पार्क व्यवस्थापकों की नजर में लायी.
इस संबंध में शुभंकर शिशु उद्यान के व्यवस्थापक तथा जिला कांट्रैक्टर एसोसिएशन के सभापति शुभेंदु चौधरी ने कहा कि एक छोटी सी घटना को बड़ा मामला बनाया जा रहा है. इस पार्क में रोज बड़ी संख्या में बच्चे आते हैं. उनके मनोरंजन के लिए खरगोश और गिनीपिग पाले गये हैं. उन्होंने कहा कि कहीं कोई अस्वास्थ्यकर माहौल नहीं है. कुछ दिन पहले एक खरगोश बीमार हो गया था. उसका इलाज कराया गया है. यह भी बता दिया गया है कि यदि प्रशासन नहीं चाहता है तो खरगोश और गिनीपिग पार्क से हटा दिये जायेंगे.
इंगलिशबाजार की बीडीओ देवश्री मुखर्जी ने कहा कि एक पिंजड़े में बेजुबान जीवों को बहुत ही अस्वास्थ्यकर स्थितियों में रखा गया है. इस पर मेरी आपत्ति है. इतने छोटे से पिंजड़े में कई सारे खरगोश और गिनीपिग रखे गये हैं. बच्चे भी इन जीवों को तंग करते हैं. ऐसा कैसे चलने दिया जायेगा. एक सरकारी जगह में इस तरह की अमानवीय व्यवस्था बरदाश्त नहीं की जा सकती. इसलिए यह मामला प्रशासन की नजर में लाया गया है.
इस बारे में चेयरमैन निहार घोष ने कहा कि महकमा अधिकारी की चिट्ठी मिलने के बाद हमने पार्क के व्यवस्थापकों से चिट्ठी मांगी है. नगरपालिका को पार्क में खरगोश और गिनीपिग पाले जाने की कोई जानकारी नहीं थी. साल में 2400 रुपये के करार पर यह पार्क एक निजी संस्था को दिया गया है. नगरपालिका ने इस पार्क के रोज की आमदनी व खर्च की रिपोर्ट भी तलब की है.
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