रैली की अनुमति नहीं मिलने से चढ़ा एबीवीपी का पारा, कहा राज्य में लोकतंत्र खतरे में
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Jan 2017 7:16 AM
सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खतरे में है. राज्य सरकार पुलिस प्रशासन को पार्टी कैडर की तरह काम में लगा रही है.यही वजह है कि पुलिस विरोधियों को कुचलने में लगी है. पुलिस तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के कहने पर काम कर रही है. यह बातें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी)के जिला प्रमुख दीपंकर चक्रवर्ती […]
वह सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा 12 जनवरी को एबीवीपी ने स्वामी विवेकानंद की जयंती यानि राष्ट्रीय युवा दिवस का पालन करने के लिए एक मशाल रैली निकालने की अनुमति पुलिस प्रशासन से मांगी थी. इसकी अनुमति नहीं मिली. रैली के पश्चात् हमारे प्रमुख कार्यकर्ताओं के ऊपर आइपीसी की धारा 143/283/506 के तहत झूठे मुकदमे दायर कर दिये गये. उन्होंने कहा कि एबीवीपी 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के दिन एक तिरंगा यात्रा का निकाल रही है. इसकी अनुमति भी अभी तक पुलिस प्रशासन ने नहीं दी है.
इसके लिए देशभक्त छात्रों के ऊपर झूठा मुकदमा दर्ज किया जाता है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार जानबूझ कर बंगाल के छात्र-युवाओं को बंगाल के महापुरुषों के गौरवशाली इतिहास जानने से वंचित करना चाहती है. इसके लिए पुलिस का उपयोग ममता सरकार कर रही है.संवाददाता सम्मेलन में नगर नगर सचिव विवेक शर्मा ने कहा कि अगर पुलिस इस तरह का भेदभावपूर्ण रवैया बंद नहीं करती है तो एबीवीपी सिलीगुड़ी नगर शाखा वृहतर आंदोलन के लिए विवश होगी. प्रेस वार्ता में जिला संयोजक सुनील यादव, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य गणेश कामती एवं प्रदेश कार्य समिति के सदस्य आलोक देवभूति भी उपस्थित थे.
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