सिलीगुड़ी कॉलेज में संगोष्ठी संपन्न

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Dec 2016 1:13 AM

विज्ञापन

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी कॉलेज के छात्र-संसद और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा में माध्यम भाषा की चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी संपन्न हो गयी. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिलीगुड़ी कॉलेज के प्राचार्य डा. सुजीत घोष ने उच्च शिक्षा में हिंदी को माध्यम भाषा के रूप में अपनाए जाने को अनुपम उपलब्धि बताया. […]

विज्ञापन
सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी कॉलेज के छात्र-संसद और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा में माध्यम भाषा की चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी संपन्न हो गयी. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिलीगुड़ी कॉलेज के प्राचार्य डा. सुजीत घोष ने उच्च शिक्षा में हिंदी को माध्यम भाषा के रूप में अपनाए जाने को अनुपम उपलब्धि बताया.

उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों का अभाव दूर होगा और कक्षाएं भी संपन्न हो पाएंगी.उन्होंने कहा कि अनुवाद के माध्यम से पुस्तकों को उपलब्ध कराने पर भी विशेष पहल की जरूरत है. साहित्यकार देवेन्द्र नाथ शुक्ल ने कहा कि भौगोलिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में हिंदी माध्यम का कॉलेज स्थापित किया जाना राजनीति प्रेरित अधिक है. संकुचित राजनीति से आगे उदार राजनीति की जरूरत है.

साहित्यकार भीखी प्रसाद वीरेंद्र ने अफ़सोस जताया कि माध्यम भाषा को लेकर हिंदी भाषी विद्यार्थी खतरों से घिरे हुए हैं. इसकी ठोस व्यवस्था होनी चाहिए.प्रो. पूनम सिंह ने इस बात पर चिंता जतायी कि हिंदी भाषी विद्यार्थी के साथ आज भी खिलवाड़ जारी है. अवसरवादी मनोवृत्ति के कारण शिक्षक समाज इस बात को गंभीरता से नहीं ले पा रहे हैं कि कालेज के पास अभी तक हिंदी भाषा के माध्यम रूप को लेकर विधिवत सूचना क्यों नहीं मिल पाई है. प्रो सरोज कुमारी शर्मा ने भाषा के प्रति भावना से ऊपर उठकर व्यवस्थागत मुहिम को अनिवार्य बताया. पत्रकार मो इरफान ने हिंदी भाषी समाज को नारंगी लाल के सपनों में खोया हुआ बताया. बिना संघर्ष सब कुछ मिल जाने की आदत ने इस मुद्दे पर हिंदी भाषियों को सजग होने से रोक रखा है. पत्रकार शशिभूषण द्विवेदी ने हिंदी भाषा के प्रति व्यवस्थागत सीमाओं के इतिहास का निंदनीय संदर्भ बताया. अभिभावक रविशंकर भट्ट ने सोच बदलने पर ज़ोर दिया और कहा कि इसके बाद हम समस्याओं के प्रति हम गंभीर हो पाएंगे. शिक्षिका निरीहता चतुर्वेदी ने भाषा आत्म-बोध और इच्छा शक्ति से भाषा-बोध को समृद्ध बनाने को अनिवार्य बताया.

विद्यार्थियों में से सुभाष राम, देवाशीष राय, रश्मि भट्ट,महिमा शर्मा,मनीषा शर्मा,मनीष गुप्ता,संतोष सिंह,पंकज कुमार ठाकुर इस संगोष्ठी में शामिल हुए और अपने विचार रखे. संगोष्ठी को संबोधित करते हुए हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार साहू ने विडंबनात्क स्थिति की ओर संकेत किया और कहा कि उत्तर बंगाल में हिंदी माध्यम के कॉलेजों का निर्माण करना भाषायी सरोकार न होकर भौगोलिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में सामुदायिक विकास के प्रति अनिवार्य सरोकार है. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में माध्यम भाषा के रूप में हिंदी को लेकर किसी को तनिक भी चिंता नहीं है भले ही वर्तमान शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी बदलती नियमावली बंगाल में हिन्दी भाषी विद्यार्थियों के लिए कितना ही चिंताजनक क्यों न हो.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola