घटना के दौरान बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने किसी तरह भागकर जान बचायी. आरोप है कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद भी हालात काबू में नहीं आये. पुलिस के सामने ही बैंक के दरवाजे, खिड़कियों, साइनबोर्ड, एटीएम पर जमकर ईंट-पत्थर चलाये गये. ग्राहकों ने बांस लेकर भी तोड़फोड़ की. बाद में रतुआ थाने के ओसी हाराधन देव के नेतृत्व में विशाल पुलिस बल मौके पर पहुंचा. पुलिस के हस्तक्षेप के करीब घंटेभर बाद हालात काबू में आये.
मेरे खाते में कुल 80 हजार रुपये हैं. लेकिन बैंक से केवल एक हजार रुपये दिये जा रहे थे. इतनी छोटी रकम लेकर मैं क्या करूंगा. लेकिन बैंक प्रबंधन ने मेरी कोई बात नहीं सुनी. बालूपुर गांव के निवासी तथा इस शाखा में बैंक ग्राहक अशरफ शेख, सैदुल शेख, इमरोज अली आदि ने बताया कि हम लोग बीते सप्ताह के गुरुवार से बैंक से खाली हाथ लौट रहे हैं. हम लोगों को कोई पैसा नहीं मिल रहा है. शाम को तीन बजे बैंक बंद हो जाता है. इसके बाद बैंक के भीतर कुछ लोगों को मोटी रकम दी जाती है.
एटीएम खुलता नहीं है. और बैंक खुलने के बाद सिर्फ हजार रुपये देने की बात कही जाती है. भारत सरकार का कहना है कि हर सप्ताह 24 हजार रुपये लिये जा सकते हैं, क्या यह सब झूठ है. इसके बाद ही बैंक में तोड़फोड़ की घटना हुई. रतुआ थाने के ओसी हाराधन देव ने बताया कि लोगों की भारी संख्या को देखते हुए हालात पर काबू पाने में वक्त लगा. अतिरिक्त पुलिस बल मंगाना पड़ा. उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति नष्ट करने का मुकदमा दर्ज किया गया है. पूरे मामले की जांच की जा रही है. हालांकि इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है.

