पैक हाउस की मशीन खराब, कमल फूल के धंधे पर मार

मालदा. मालदा के पैक हाउस में कमल के फूलों को संरक्षित रखने की व्यवस्था न होने से फूल उत्पादक और थोक कारोबारी चिंता में पड़ गये हैं. इस बारे में पैक हाउस प्रबंधन का कहना है कि मशीन खराब होने की वजह से फूलों को संरक्षित करके नहीं रखा जा पा रहा है. नतीजतन, निजी […]
उल्लेखनीय कि मालदा से बड़े पैमाने पर कमल फूल सिलीगुड़ी समेत पूरे उत्तर बंगाल, बिहार, झारखंड और असम में भेजे जाते हैं. राज्य सरकार के बागवानी विभाग की कोशिशों से मालदा में कमल फूल का उत्पादन बढ़ा है. पूजा के समय अच्छे मुनाफे की उम्मीद में बड़ी संख्या में कृषक और फूल व्यवसायी कमल फूल की खरीद-बिक्री में व्यस्त रहते हैं. लेकिन सरकारी व्यवस्था खराब रहने की वजह से फूल किसानों को अपना माल औने-पौने दाम में बेचना पड़ रहा है. इस बारे में मालदा पैक हाउस के इनचार्ज राजशेखर मित्र ने कोई बयान देने से इनकार कर दिया.
हजारी और सिंगल. पूजा के समय इन दोनों प्रजातियों की जबरदस्त मांग रहती है. फूल के दाम भी शेयर बाजार की तरह उठते-गिरते हैं. अगर पैक हाउस में फूलों को संरक्षित रखने की व्यवस्था होती, तो इस बार स्थानीय कृषक और व्यवसायी दोनों मोटा मुनाफा कमाते. सरकारी पैक हाउस के एक पैकेट में 500 से 1000 पीस होते हैं. कोई पांच पैकेट माल रखता है, तो कोई दस पैकेट. प्रति पीस फूल का 30 पैसा भाड़ा देना होता है. जबकि निजी कोल्ड स्टोर में यह खर्च 90 पैसा से एक रुपये आता है. अधिकतर फूल कारोबारी अभी हावड़ा फूल बाजार के माध्यम से खरीद-बिक्री कर रहे हैं. मालदा के कृषकों से 20 दिन पहले ही माल ले गये हैं, जहां उसे कोल्ड स्टोर में संरक्षित रखा जायेगा. उन्होंने कहा कि इस बार पूजा के मौसम में एक पीस कमल फूल आठ से 12 रुपये की दर से बिकने का अनुमान है.
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