इसी में से काफी पीड़ित पास ही स्थित चमाग्राम रेलवे स्टेशन चले गये और वहां रेल रोको आंदोलन की घोषणा कर दी. रेल पटरियों पर सैकड़ों लोगों के जमा हो जाने की वजह से ट्रेनों की आवाजाही भी काफी देर तक बंद रही. इन लोगों का आरोप है कि नदी कटाव की वजह से सैकड़ों लोग अपना घर-बार गंवा चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से पीड़ितों की कोई मदद नहीं की जा रही है. सिर्फ कालियाचक-3 ब्लॉक के बिन नगर-1 ग्राम पंचायत के अधीन सरकारपाड़ा के 155 परिवारों का घर-बार गंगानदी में समा गया है. जो कुछ घर बच गये हैं वह भी गंगा में समाने के कगार पर है. एक तरह से कहें तो आने वाले दिनों में सरकारपाड़ा गांव का अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा.
प्रशासन के इसी रवैये से आम लोग नाराज होकर आंदोलन कर रहे हैं. पंचायत के हाथ में कुछ भी नहीं है. सरकार टोला से लेकर चाइना बाजार तक दो किलोमीटर इलाके में कटाव से स्थिति गंभीर है. घर-बार गंवाने के बाद आम लोग खुले आसमान के नीचे जिंदगी जीने पर मजबूर हैं. देवव्रत सरकार, सुशांत सरकार, सुकुमार मंडल आदि परिवारों ने बताया है कि घर-बार गंवाने के बाद जीना दूभर हो गया है. कहां शरण लेंगे, कुछ नहीं समझ पा रहे हैं. इधर, मालदा सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता रमेश कुमार सिंह ने बताया है कि गंगा नदी का पानी फिलहाल खतरे के निशान से नीचे है. दो-तीन दिन बाद जल स्तर बढ़ने की संभावना है. उत्तर प्रदेश तथा बिहार में भारी बारिश की वजह से ही गंगा के जल स्तर में वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि कटाव को लेकर राज्य सरकार के हाथ में कुछ भी नहीं है. राज्य सरकार कुछ भी नहीं कर सकती. यह केंद्र सरकार तथा फरक्का बैराज प्रबंधन का काम है. उन्हीं लोगों को कटाव प्रभावित इलाके में बांध बनाना है. सुनने में आया है कि फरक्का बैराज प्रबंधन ने काम की शुरुआत की है.

