इस इलाके में रहने वाले लोगों ने तीस्ता के कहर से बचाने के लिए माल ब्लॉक तथा पंचायत समिति से मदद की गुहार लगायी थी. उसके बाद ही बांध मरम्मती का काम शुरू करने का निर्णय लिया गया. 100 दिन रोजगार योजना के तहत सीमेंट के बोरे में मिट्टी भरकर बांध बनाने का काम चल रहा है. पानी को रोकने में भी थोड़ी सफलता मिली है.
हालांकि गांव वालों का डर दूर नहीं हुआ है. स्थानीय निवासी अब्दुल कादिर ने कहा है कि मिट्टी के बांध का अस्तित्व कितने दिनों तक कायम रहेगा, यह कह पाना काफी मुश्किल है. कमोबेश यही आशंका अन्य लोगों की भी है. इस मुद्दे पर माल पंचायत समिति के सदस्य नरेश राय का कहना है कि ग्रिन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार नदियों से बालू तथा पत्थर निकालने का काम बंद है. किसी भी तरीके से स्थानीय लोगों को तीस्ता के कहर से बचाना जरूरी है. इसी वजह से सीमेंट के बोरे में मिट्टी भरकर ही बांध बनाने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा अन्य कोई चारा नहीं है. बोल्डर मिलने की उम्मीद में इतने लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता.

