अदालती निर्देश से बोल्डर की आपूर्ति बंद

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Jul 2016 1:37 AM

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जलपाईगुड़ी. बोल्डर के अभाव में आखिरकार महकमा प्रशासन ने मिट्टी से ही रिलिफ बांध मरम्मती का काम शुरू कर दिया है. जलपाईगुड़ी के माल महकमा के अधीन चेंगामारी ग्राम पंचायत के गोलाबाड़ी में रिलिफ बांध मरम्मती का काम शुरू किया गया है. तीस्ता में बाढ़ की वजह से 20 मीटर बांध टूट गया है और […]

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जलपाईगुड़ी. बोल्डर के अभाव में आखिरकार महकमा प्रशासन ने मिट्टी से ही रिलिफ बांध मरम्मती का काम शुरू कर दिया है. जलपाईगुड़ी के माल महकमा के अधीन चेंगामारी ग्राम पंचायत के गोलाबाड़ी में रिलिफ बांध मरम्मती का काम शुरू किया गया है. तीस्ता में बाढ़ की वजह से 20 मीटर बांध टूट गया है और करीब डेढ़ हजार परिवार इससे प्रभावित हुए हैं. बांध टूटने की वजह से तीस्ता नदी के पानी से डेढ़ हजार परिवार बेघर हो गये हैं.
इन लोगों को तीस्ता के कहर से बचाने के लिए ही बांध मरम्मती का काम शुरू किया गया है. यहां उल्लेखनीय है कि ग्रिन ट्रिब्यूनल ने मार्च महीने से ही उत्तर बंगाल के सभी नदियों से बोल्डर, बालू की खुदाई पर रोक लगा दी है. इसी वजह से बांध की मरम्मती के लिए बोल्डर की आपूर्ति बंद है. गोलाबाड़ी रिलिफ बांध वर्षों पुराना है. पिछले कुछ वर्षों से हर साल ही तीस्ता नदी में बाढ़ से इस बांध को नुकसान पहुंचता है. इस बार तो भारी बाढ़ में रिलिफ बांध के 20 मीटर इलाके को नेस्तानाबूत कर दिया है.

इस इलाके में रहने वाले लोगों ने तीस्ता के कहर से बचाने के लिए माल ब्लॉक तथा पंचायत समिति से मदद की गुहार लगायी थी. उसके बाद ही बांध मरम्मती का काम शुरू करने का निर्णय लिया गया. 100 दिन रोजगार योजना के तहत सीमेंट के बोरे में मिट्टी भरकर बांध बनाने का काम चल रहा है. पानी को रोकने में भी थोड़ी सफलता मिली है.

हालांकि गांव वालों का डर दूर नहीं हुआ है. स्थानीय निवासी अब्दुल कादिर ने कहा है कि मिट्टी के बांध का अस्तित्व कितने दिनों तक कायम रहेगा, यह कह पाना काफी मुश्किल है. कमोबेश यही आशंका अन्य लोगों की भी है. इस मुद्दे पर माल पंचायत समिति के सदस्य नरेश राय का कहना है कि ग्रिन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार नदियों से बालू तथा पत्थर निकालने का काम बंद है. किसी भी तरीके से स्थानीय लोगों को तीस्ता के कहर से बचाना जरूरी है. इसी वजह से सीमेंट के बोरे में मिट्टी भरकर ही बांध बनाने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा अन्य कोई चारा नहीं है. बोल्डर मिलने की उम्मीद में इतने लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता.

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