डंकन्स के खिलाफ अब तक 118 मामले दर्ज

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Jun 2016 8:10 AM

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जलपाईगुड़ी : डंकन्स ग्रुप के बंद पड़े चाय बागानों की समस्या खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. राज्य सरकर के श्रम विभाग की ओर से कई बार बैठक बुलाये जाने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ है. आखिरकार अधिकारियों ने डंकन्स ग्रपु के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है. […]

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जलपाईगुड़ी : डंकन्स ग्रुप के बंद पड़े चाय बागानों की समस्या खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. राज्य सरकर के श्रम विभाग की ओर से कई बार बैठक बुलाये जाने के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ है. आखिरकार अधिकारियों ने डंकन्स ग्रपु के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर ली है. श्रम विभाग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, श्रमिकों तथा कर्मचारियों के करोड़ों रुपये बकाया रखने के मामले में डंकन्स के खिलाफ अब तक 118 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो अदालत में विचाराधीन है. इसके अलावा श्रम विभाग ने इस कंपनी के खिलाफ और भी कई मुकदमे दर्ज करने की तैयारी कर ली है.
लेकिन गवाहों की कमी की वजह से इसमें परेशानी आ रही है. रविवार को भी डंकन्स समूह के सात बंद पड़े चाय बागानों को लेकर श्रम विभाग ने एक बैठक की. इसमें भी समस्या की कोई समाधान नहीं निकला. इन सात चाय बागानों में 17 हजार से अधिक चाय श्रमिक बेरोजगार हैं. इन लोगों के सामने रोजी-रोटी संकट है. समस्या यह है कि डंकन्स के सात चाय बागानों में से चार में राज्य सरकार को कोई गवाह नहीं मिल रहा है, जो इस कंपनी के खिलाफ अदालत में गवाही दे सके. इस मामले में संयुक्त श्रम आयुक्त समीर कुमार बसु का कहना है कि डंकन्स के खिलाफ मुकदमे के अलावा और कोई रास्ता नहीं है.

यहां उल्लेखनीय है कि अलीपुरद्वार के मदारीहाट ब्लॉक स्थित वीरपाड़ा, डिमडिमा, तुलसीपाड़ा, फंटापाड़ा, धुमचीपाड़ा, गैरगंडा एवं लंकापाड़ा चाय बागान वर्ष 2015 के शुरू से ही बंद है. इन चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिक भूखों मर रहे हैं. वेतन, राशन, पीएफ, ग्रेच्युटी आदि की सुविधा इन लोगों को नहीं मिल रही है.

कुछ महीने पहले केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण डंकन्स के चाय बागानों का दौरा कर गई थी. उन्होंने कहा था कि टी बोर्ड द्वारा इन चाय बागानों का अधिग्रहण किया जायेगा. उसके बाद राज्य सरकार द्वारा भी कंपनी के खिलाफ सीआईडी जांच करायी जा रही है. इसके बाद भी परिस्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. संयुक्त श्रम आयुक्त समीर कुमार बसु ने बताया है कि राज्य सरकार की ओर से श्रमिकों का बकाया भुगतान कर बागान खोलने के लिए कई बार कहा गया है, उसके बाद भी प्रबंधन की नींद नहीं खुली है. डंकन्स के मालिकों पर राज्य सरकार के कहने का कोई असर नहीं हो रहा है. स्वाभाविक तौर पर कानूनी प्रक्रिया अपनाने के अलावा और कोई चारा नहीं है.

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