सिलीगुड़ी नगर निगम में वाम बोर्ड पर गहराया संकट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Jun 2016 1:28 AM

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सिलीगुड़ी. राज्य में 211 विधानसभा सीटों पर कब्जा कर तृणमूल कांग्रेस दोबारा सत्ता में आयी है. यह अलग बात है इस आंधी में भी पार्टी मालदा और दार्जिलिंग जिले पैर नहीं जमा पायी. उसके बाद भी तृणमूल की नजर सिलीगुड़ी महकमा परिषद और सिलीगुड़ी नगर निगम पर टिकी है. सिलीगुड़ी महकमा परिषद और नगर निगम […]

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सिलीगुड़ी. राज्य में 211 विधानसभा सीटों पर कब्जा कर तृणमूल कांग्रेस दोबारा सत्ता में आयी है. यह अलग बात है इस आंधी में भी पार्टी मालदा और दार्जिलिंग जिले पैर नहीं जमा पायी. उसके बाद भी तृणमूल की नजर सिलीगुड़ी महकमा परिषद और सिलीगुड़ी नगर निगम पर टिकी है. सिलीगुड़ी महकमा परिषद और नगर निगम पर वाम मोरचा का कब्जा है.

माकपा के गठबंधन साथी कांग्रेस ने ही सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर के कार्यों पर सवाल खड़ा कर दिया है. पत्रकारों को संबोधित करते हुए सिलीगुड़ी नगर निगम में कांग्रेस के वार्ड पार्षद और तीन नंबर बोरो कमिटी के चेयरमैन सुजय घटक ने मेयर अशोक भट्टाचार्य पर जोरदार हमला बोला है. निगम इलाके में विकास कार्यों की गति तेज नहीं करने पर आंदोलन करने की धमकी उन्होंने दी है.

हाल में संपन्न विधानसभा चुनाव में जिस कांग्रेस ने माकपा उम्मीदवार अशोक भट्टाचार्य के समर्थन में प्रचार-प्रसार किया एवं सिलीगुड़ी का विधायक बनाया, आज उसी पार्टी के एक पार्षद ने हमलावर रूख अख्तियार कर लिया है. हालांकि राज्य स्तर पर अभ भी कांग्रेस व माकपा का गठबंधन बना हुआ है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिलीगुड़ी नगर निगम के तख्तापलट का समय आ गया है. तृणमूल कांग्रेस अपना दांव खेल चुकी है. सिलीगुड़ी नगर निगम के बजट को लेकर तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बयानों में काफी समानताएं पायी जा रही है. नगर निगम की सत्ता से माकपा को हटाने की तैयारी शुरू हो गयी है.

आज एक पत्रकार सम्मेलन में कांग्रेस नेता व तीन नंबर बोरो कमिटी के चेयरमैन सुजय घटक ने साफ तौर कहा कि पिछले एक वर्षों में मेयर बनकर अशोक भट्टाचार्य ने काफी अच्छी राजनीति की है,लेकिन मेयर के रूप में वह विफल साबित हुए हैं. विकास का कोई कार्य नजर ही नहीं आता है. श्री घटक ने कहा कि विकास को लेकर मेयर हमेशा से ही राज्य सरकार पर असहयोग का आरोप लगाते आये हैं. जबकि स्वास्थ विभाग में केंद्र सरकार का करोड़ो रूपया पड़ा हुआ है. उसका कोई उपयोग ही नहीं हो रहा है. पिछले एक वर्ष के मुकाबले तृणमूल के साथ कांग्रेस ने निगम इलाके काफी विकास किया था.

कहा जाय तो मेयर अशोक भट्टाचार्य के मुकाबले पूर्व कांग्रेसी मेयर गंगोत्री दत्ता काफी सफल रही थी. कांग्रेस पार्षद के इस रख को देखकर रातनीतिक हलकों में गहमा गहमी है. सभी ओर इसको लेकर चरचा शुरू हो गयी है. राजनीतिक विश्लेष्कों का मानना है कि कांग्रेस के इस रूख से सिलीगुड़ी नगर निगम पर तृणमूल के कब्जे की संभावना काफी प्रबल हो गयी है. सिलीगुड़ी नगर निगम में माकपा ने बहुमत के बल पर नहीं बल्कि निर्दलीय वार्ड पार्षद अरविंद घोष के समर्थन से बोर्ड गठित किया है. दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस 17 वार्डों पर कब्जा जमाने में सफल रही थी. जबकि चार वार्ड कांग्रेस की झोली में एवं दो वार्डों पर भाजपा का कब्जा है.

कांग्रेसी पार्षद के रूख से उनके तृणमूल को समर्थन देने की संभावना भी बढ़ गयी है. भाजपा यदि तृणमूल के समर्थन में खड़ी हो जाए तो फिर समीकरण फिर से अरविंद घोष के फैसले पर आकर टिक जायेगी. श्री घोष किंग मेकर की भूमिका निभा सकते हैं. कांग्रेसी पार्षद के इस रूख पर अब सवाल भी उठने लगे हैं. सिलीगुड़ी नगर निगम की वाम बोर्ड के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध का जो रूख अपनाया है, क्या प्रदेश कांग्रेस उससे सहमत है,के जबाब में सुजय घटक ने कहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का माकपा के साथ गठबंधन था, राज्य स्तर पर अब भी यह बरकरार है. निगम की गलत नीतियों पर माकपा बोर्ड का विरोध नहीं करने संबंधी कोइ निर्देश उन्हें प्रदेश कांग्रेस से महीं मिला है. सिलीगुड़ी वासियों के हित में जो ठीक होगा कांग्रेस उसी के साथ खड़ी रहेगी. कांग्रेस सिलीगुड़ी नगर निगम में एक सक्रिय विरोधी की भूमिका का पालन करेगी.

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