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सीपीएम उम्मीदवार की हार से टूट गये हैं हिमानी के पिता

जलपाईगुड़ी. बेटी की हत्या का प्रतिवाद करने उतरे हिमानी बर्मन के पिता सीपीएम की हार से टूट गये हैं. जलपाईगुड़ी जिले की धूपगुड़ी सीट पर सीपीएम का कब्जा बरकरार रहे, इसके लिए हिमानी के पिता अनुकूल बर्मन ने भी काफी जोर लगाया था, लेकिन वह असफल रहे. धूपगुड़ी नगरपालिका के नौ नंबर वार्ड की निवासी […]

जलपाईगुड़ी. बेटी की हत्या का प्रतिवाद करने उतरे हिमानी बर्मन के पिता सीपीएम की हार से टूट गये हैं. जलपाईगुड़ी जिले की धूपगुड़ी सीट पर सीपीएम का कब्जा बरकरार रहे, इसके लिए हिमानी के पिता अनुकूल बर्मन ने भी काफी जोर लगाया था, लेकिन वह असफल रहे. धूपगुड़ी नगरपालिका के नौ नंबर वार्ड की निवासी दसवीं की छात्रा हिमानी की हत्या के बाद उसका निर्वस्त्र लहूलुहान शव मिला था. वर्ष 2014 की यह घटना आज भी एक रहस्य ही है. लेकिन इस घटना ने राज्य की राजनीति को काफी प्रभावित किया था.
हिमानी के बलात्कार व हत्या के मामले को लेकर माकपा, कांग्रेस और भाजपा ने सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था. लेकिन इस विधानसभा चुनाव में तृणमूल उम्मीदवार ने कांग्रेस समर्थित माकपा के उम्मीदवार और भाजपा उम्मीदवार को पीछे छोड़कर प्रथम स्थान हासिल किया है. अव सवाल यह सामने आ रहा है कि हिमानी के मामले को लेकर पिछले दो वर्षों से तृणमूल के विरुद्ध प्रचार करने के बाद भी माकपा इस सीट को अपने अधीन रखने में असफल कैसे हुई?
जिस वार्ड में हिमानी का घर है वहां के 147 नंबर बूथ पर भाजपा उम्मीदवार आगुन राय को मात्र 87 वोट मिले हैं, जबकि गंठबंधन उम्मीदवार ममता राय को 305 वोट मिले हैं. वहीं तृणमूल को 737 वोट मिले हैं. इसी वार्ड के 188 नंबर बूथ पर भाजपा को 147 और गंठबंधन को 281, जबकि तृणमूल को 518 वोट मिले हैं.
वर्ष 2014 के अगस्त महीने में एक स्थानीय तृणमूल नेता की सालिशी सभा में अनुकूल वर्मन के साथ मारपीट की गयी थी. हिमानी ने अपने पिता के साथ हो रहे व्यवहार का विरोध किया था. तृणमूल नेताओं द्वारा हिमानी को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया था. बाध्य होकर हिमानी सभा से निकल गयी, लेकिन वापस घर नहीं पहुंची. दूसरे दिन निकटवर्ती रेल लाइन के पास उसका नग्न शव बरामद हुआ. अनुकूल द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी व माकपा के दवाब में पुलिस ने तृणमूल के कुछ नेताओं को गिरफ्तार भी किया था. बाद में अदालत ने उन्हें जमानत देकर रिहा कर दिया.
घटना के कुछ महीनों बाद हिमानी हत्याकांड मामले के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी नित्यानंद सिंह का शव रेल लाइन के पास से बरामद हुआ था. नित्यानंद की हत्या के मामले में उल्टा हिमानी के पिता को ही फंसा दिया गया. उन्हें जेल भी हुई. बाद में उन्हें जमानत मिली. कानून के भी अजीब दस्तूर हैं. आरोपी को अदालत जमानत देती है, जबकि पीड़ित को जेल भेज दिया जाता है. कानून के बाद अब तो लोगों का दूसरे पर से भी विश्वास समाप्त होने लगा है. आश्चर्य तब हुआ जब तृणमूल को इस इलाके से अधिक वोट प्राप्त हुआ. हालांकि कांग्रेस समर्थित माकपा उम्मीदवार के समर्थन में मृत हिमानी के पिता भी उतरे थे.
धूपगुड़ी सीट से तृणमूल की विजय हुई है. विधानसभा चुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद हिमानी का परिवार अब आतंक के साये में जीने को बाध्य है. अनुकूल बर्मन ने बताया कि जनता के फैसले पर आश्चर्य होता है. बेटी की हत्या के बाद पत्नी और हिमानी की बहन के साथ आतंक के साये में जीने को हम बाध्य हैं.

वहीं विजयी तृणमूल उम्मीदवार मिताली राय ने कहा कि आतंक का कोई कारण नहीं होना चाहिए. पीड़ित परिवार के प्रति उनकी भी सहानुभूति है. लेकिन झूठा आरोप जनता कभी स्वीकार नहीं करती है और चुनाव परिणाम इसे प्रमाणित करता है. वहीं माकपा उम्मीदवार ममता राय ने इस संबध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. पिछले बार की अपेक्षा इस चुनाव में हुई चूक की समीक्षा करने में वह व्यस्त हैं.

Prabhat Khabar Digital Desk
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