ढेरों पुरस्कार पा चुके लेखक तरस रहे अपनी देखभाल को
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 May 2016 2:03 AM
दार्जिलिंग. नेपाली साहित्य जगत के प्रसिद्ध साहित्यकार वीरेंद्र सुब्बा बुढ़ापे में अपनी देखभाल को तरस रहे हैं. उनके पास अपना कोई घर भी नहीं है. 89 साल के वीरेंद्र सुब्बा शहर के तामांग बौद्ध गुम्फा रोड स्थित क्रामाकपा आफिस के एक छोटे से कमरे में साल 2014 से रह रहे हैं. नेपाली साहित्य जगत को […]
मरने के बाद सम्मान जतानेवाले हमारे समाज, हमारे संघों-संस्थाओं की नजर अभी तक उप पर नहीं पड़ी है. बातचीत के दौरान वृद्ध साहित्यकार ने कहा कि मुझे कालिम्पोंग का पारसमणि पुरस्कार,कर्सियांग का शिव कुमार पुरस्कार मिला है. दार्जिलिंग के नेपाली साहित्य सम्मेलन के साथ ही सिक्किम, नेपाल और जीटीए आदि ने भी मुझे सम्मानित किया है. आज आप अपना पेट कैसे भरते हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग तीन बार मुझे 50-50 हजार रुपये दे चुके हैं. इस तरह डेढ़ लाख रुपय मिला. इसी तरह से जीटीए ने भी पैसा दिया है. यह सारा रुपया मैंने अपने बैंक खाते में रखा है. इस पैसे का ब्याज मैं हर महीने उठाता हूं और उसी से अपना पेट भरता हूं. आजकल क्या लिख रहे हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कविता आदि लिखने में व्यस्त होने की जानकारी दी . 89 साल के बूढ़े वीरेन्द्र सुब्बा का जोश और हौसला युवाओं जैसा है.
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