बाइचुंग को कहीं नगर निगम का चुनाव न लड़ा दें ममता

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सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी और इसके आसपास के इलाकों में इन दिनों हर ओर विधानसभा चुनाव को लेकर चरचा जोरों पर है. चौराहे व नुक्कड़ से लेकर चाय दुकानों, ट्रेन-बसों में भी लोग चुनाव नतीजे को लेकर बातचीत करने में व्यस्त हैं. विभिन्न चौक-चौराहे का चक्कर काटने के बाद हमने सोचा कि किसी लोकल बस में भी […]

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सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी और इसके आसपास के इलाकों में इन दिनों हर ओर विधानसभा चुनाव को लेकर चरचा जोरों पर है. चौराहे व नुक्कड़ से लेकर चाय दुकानों, ट्रेन-बसों में भी लोग चुनाव नतीजे को लेकर बातचीत करने में व्यस्त हैं.
विभिन्न चौक-चौराहे का चक्कर काटने के बाद हमने सोचा कि किसी लोकल बस में भी चुनावी सफर कर आम लोगों की राय जानने की कोशिश की जाये. सिलीगुड़ी जंक्शन से नक्सलबाड़ी के लिए हम एक सिटी बस में सवार हो गये. इस बस यात्रा करने का मुख्य मकसद सिलीगुड़ी के साथ ही माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी विधानसभा सीट पर चल रही चर्चाओं की जानकारी हासिल करना था. आम तौर पर इन दिनों बसों में अधिक भीड़ नहीं हो रही है. नक्सलबाड़ी वाली बस में सवार होते ही पीछे की एक सीट मिल गयी. वहां कुछ समय तक हम खामोश रहे. पास बैठे भाई साहब अपने एक सह-यात्री के साथ सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार बाइचुंग भूटिया की चर्चा कर रहे थे.
एक ने बड़े व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि आनेवाले दिनों में कहीं बाइचुंग भूटिया को सिलीगुड़ी नगर निगम के किसी वार्ड से पार्षद का चुनाव न लड़ना पड़े. उसने कहा कि ममता बनर्जी ने बाइचुंग भूटिया को लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया था और वह भाजपा उम्मीदवार एसएस अहलूवालिया से हार गये थे. उसके बाद भी ममता बनर्जी ने उन्हें सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनावी टिकट पकड़ा दिया है. अगर वह इस चुनाव में भी हार जाते हैं, तो क्या अगली बार ममता बनर्जी उन्हें नगर निगम चुनाव में उतार देंगी‍? दोनों की बातों को सुन मेरी भी दिलचस्पी बढ़ गयी.
मैंने पास बैठे भाई साहब का नाम पूछा. उन्होंने अपना नाम विजय कुमार बताया. वह सिलीगुड़ी के वार्ड नंबर तीन इलाके के रहनेवाले हैं. वह जिनके साथ बैठे थे, वह भी वार्ड नंबर तीन के ही रहनेवाले थे. उन्होंने अपना नाम बताने से इनकार कर दिया. मैंने फिर भी उनसे पूछ लिया कि वह किस तरह से बाइचुंग भूटिया की हार के दावे कर रहे हैं. इस पर उन्होंने कहा कि अभी हार-जीत की बात नहीं हो रही है. लेकिन जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस में गुटबाजी जारी है, उससे यदि बाइचुंग हार जायें, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए. उनका मुकाबला माकपा के पुराने दिग्गज अशोक भट्टाचार्य से है.
इस चर्चा तक हमलोग माटीगाड़ा पहुंच गये थे. माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट से माकपा समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार शंकर मालाकार चुनाव लड़ रहे हैं. उनका मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस के अमर सिन्हा से है. हम तीन लोग आपस में चर्चा कर ही रहे थे कि बगल वाली सीट पर बैठे हाकिमपाड़ा निवासी बप्पा चटर्जी भी कूद पड़े. बातचीत से वह तृणमूल समर्थक लग रहे थे. उन्होंने कहा कि बाइचुंग भूटिया को नगरपालिका चुनाव लड़ने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, क्योंकि वह अशोक भट्टाचार्य को हराकर विधानसभा पहुंच रहे हैं. उनका साफ-साफ कहना था कि ‘जोट होने और नहीं होने’ का कोई मतलब नहीं है. पूरे राज्य में दीदी का डंका बज रहा है. सभी विरोधी दीदी के आगे हवा हो जायेंगे.’ वह जब ऐसा बोल रहे थे, तो थोड़े गुस्से में भी थे.

मैंने मौका लगते ही बात को बदल दिया. मैंने पूछा कि सिलीगुड़ी की बात छोड़ दीजिए. माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर क्या होगा? इस पर एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यहां तो मामला बिल्कुल ही अजीब है. कांग्रेस से ज्यादा तो माकपा के लोग कांग्रेस उम्मीदवार शंकर मालाकार के लिए काम कर रहे हैं. इस भाई साहब ने अपना नाम नागेंद्र प्रसाद बताया. उन्होंने कहा कि वह पिछले दिनों हाट के लिए माटीगाड़ा आये थे. उन्होंने देखा कि कांग्रेस उम्मीदवार शंकर मालाकार के लिए माकपा के लोग कांग्रेस के झंडे लगा रहे थे. श्री प्रसाद ने कहा कि वह मूल रूप से बिहार के सीवान निवासी हैं, लेकिन पिछले 40 वर्षोँ से सिलीगुड़ी में ही रह रहे हैं. श्री प्रसाद ने कहा कि वह पहले कांग्रेस और 34 वर्षों तक वाम मोरचा का राज देख चुके हैं. अब तृणमूल का राज भी उन्होंने देख लिया. माकपा और कांग्रेस के बीच इतनी निकटता अभी नहीं देखी थी. यह ममता बनर्जी की आंधी का ही असर है कि कांग्रेस का नाम सुनकर दूर भागनेवाले माकपा के लोग अभी कांग्रेस का झंडा लगा रहे हैं.

इस बात की चर्चा करते-करते हमारी बस बागडोगरा पहुंच चुकी थी. तब तक बस में काफी भीड़ हो चुकी थी. आपस में बात करना भी मुश्किल था. हम इस बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन भीड़ की वजह से शोर के कारण बातचीत को आगे जारी रखना संभव नहीं था. नक्सलबाड़ी पहुंचने से पहले ही हम पानीटंकी में उतर गये. करीब दो घंटे के इस सफर में चुनाव को लेकर दिलचस्प बातें आम लोगों ने बतायी.
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