उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिहार बंगाल से काफी पिछड़ा राज्य था. लेकिन आज बिहार बंगाल से कहीं अधिक विकसित हो चुका है. रोजी-रोटी के लिए एक समय बिहार से मजदूर भाई पलायन को मजबूर हुए और पड़ोसी राज्य बंगाल में आए, लेकिन आज रोजगार के अभाव में बंगाल से पलायन शुरू हो गया है. एक समय बिहार को अंधेरा राज्य कहा जाता था,लेकिन आज घर-घर में बिजली है. वहीं ममता राज में बंगाल में मजदूरी कर किसी तरह अपना संसार चलानेवाले गरीब मजदूर व साधारण जनता के पास मनमाना बिजली बिल भेजकर घरों की बिजली काट दी जा रही है.
इसलिए उन्होंने मजदूर भाईयों से 17 अप्रैल को चुनाव के दौरान सिलीगुड़ी व डाबग्राम-फूलबाड़ी सीट से माकपा उम्मीदवारों को जिताने के लिए हंसिया-हथौड़ी-तारा चुनाव चिह्न और माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी व फांसीदेवा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने के लिए हाथ चुनाव चिह्न का बटन दबाने की अपील की. इस सभा में मौजूद सीपीआइ नेता उज्जवल चौधरी, सीटू नेता व निगम में एमएमआइसी परिमल मित्र, आठ नंबर वार्ड की पूर्व पार्षद शालिनी डालमिया, इंटक नेता बिंदेश्वरी सिंह, शंभुनाथ भारती, दिलीप दास व अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी सभा को संबोधित कर इस विधानसभा चुनाव में वाम-कांग्रेस गठबंधन को जीत दिलाने की अपील की.

